समस्तीपुर न्यूज: जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों और किशोर-किशोरियों के बेहतर पोषण और स्वास्थ्य को लेकर शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है. मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय, बिहार के निर्देश पर अब जिले के सभी सरकारी स्कूलों में ‘शुगर एवं फैट फ्लैक्स बोर्ड’ लगाए जाएंगे. इन बोर्डों के जरिए बच्चों को ज्यादा चीनी और वसा के सेवन से होने वाले नुकसान की जानकारी दी जाएगी, ताकि वे कम उम्र से ही स्वस्थ खान-पान की आदत अपना सकें.
चेतना सत्र में रोज होगी पोषण की बात
मध्याह्न भोजन योजना निदेशक विनायक मिश्र की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि पूर्व में जारी आदेशों में तकनीकी संशोधन के बाद ‘शुगर/फैट बोर्ड’ की संशोधित पीडीएफ प्रति जारी की गई है. निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रखंड स्तरीय अधिकारियों और प्रखंड साधन सेवियों के माध्यम से संशोधित सामग्री सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों तक पहुंचाई जाए.
विद्यालयों में सुबह होने वाले चेतना सत्र के दौरान इन बोर्डों के माध्यम से बच्चों को जागरूक किया जाएगा. उन्हें बताया जाएगा कि जरूरत से ज्यादा चीनी और फैट का सेवन स्वास्थ्य के लिए किस तरह नुकसानदायक हो सकता है.
बच्चों में विकसित होगी स्वस्थ खान-पान की आदत
डीपीओ एमडीएम प्रेम शंकर झा ने बताया कि निदेशालय से मिले निर्देश के आधार पर जिले के सभी सरकारी स्कूलों में संशोधित ‘शुगर एवं फैट फ्लैक्स बोर्ड’ लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. उन्होंने कहा कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है.
डीपीओ ने बताया कि आज के समय में कम उम्र में ही असंतुलित खान-पान के कारण कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देखने को मिल रही हैं. ऐसे में बच्चों को शुरुआत से ही सही खान-पान के प्रति जागरूक करना जरूरी है. चेतना सत्र में नियमित रूप से बच्चों को सीमित मात्रा में चीनी और वसा के सेवन के फायदे समझाए जाएंगे.
वैज्ञानिक जानकारी देने में यूनिसेफ भी करेगा सहयोग
इस अभियान में यूनिसेफ के पोषण विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पोषण से जुड़ी सही और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना है. विभाग की ओर से सभी संबंधित अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों को निर्देश की प्रति उपलब्ध कराते हुए इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है.
शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूलों के जरिए बच्चों को जागरूक करने से इसका असर उनके परिवारों तक भी पहुंचेगा. बच्चे घर में भी संतुलित आहार और सीमित चीनी-फैट के सेवन को लेकर अपने अभिभावकों को जागरूक कर सकेंगे.
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