एक कमरा, पांच कक्षाएं और 65 बच्चे... डिजिटल इंडिया के दौर में समस्तीपुर का स्कूल बेहाल

समस्तीपुर का राजकीय प्राथमिक उर्दू विद्यालय, काशीपुर 76 वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है. स्कूल सिर्फ एक कमरे से संचालित हो रहा है, जहां पहली से पांचवीं तक के 65 बच्चे एक साथ पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

समस्तीपुर स्टूडेंट्स न्यूज: एक ओर देश में नई शिक्षा नीति, स्मार्ट क्लास और डिजिटल इंडिया की बातें हो रही हैं, वहीं समस्तीपुर शहर का एक सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है. रेलवे गंडक कॉलोनी स्थित राजकीय प्राथमिक उर्दू विद्यालय, काशीपुर पिछले करीब 76 वर्षों से अपनी जमीन और स्थायी भवन का इंतजार कर रहा है. हालत यह है कि स्कूल ईदगाह परिसर में बने एस्बेस्टस की छत वाले महज एक कमरे से संचालित हो रहा है, जहां पहली से पांचवीं तक के 65 बच्चे एक साथ पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

एक कमरे में लगती हैं पांचों कक्षाएं

विद्यालय में पहली से पांचवीं तक कुल 65 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. हैरानी की बात यह है कि सभी बच्चों की पढ़ाई एक ही कमरे में होती है. विद्यालय में प्रधान शिक्षक फणीश्वर नाथ रेणु सहित कुल सात शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं, लेकिन अलग-अलग कक्षाओं के लिए कमरे नहीं होने के कारण सभी शिक्षक एक ही समय में उसी कमरे में बच्चों को पढ़ाते हैं. ऐसे माहौल में पढ़ाई के दौरान लगातार शोर-शराबा रहता है, जिससे बच्चों का ध्यान भटकता है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित होती है.

गर्मी में भट्टी बन जाता है कमरा

बरसात हो या गर्मी, विद्यालय की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी रहती है. एस्बेस्टस की छत तेज धूप में भट्टी की तरह तपने लगती है. बिजली की व्यवस्था भी नियमित नहीं है. पीने के पानी समेत कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव बच्चों और शिक्षकों की परेशानी को और बढ़ा देता है. इसके बावजूद शिक्षक सीमित संसाधनों में नियमित पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं.

कई बार उठी मांग, नहीं मिला समाधान

स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय के लिए जमीन और भवन उपलब्ध कराने की मांग कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने रखी गई. हालांकि अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं. वर्षों बीतने के बाद भी स्कूल को न तो अपनी जमीन मिल सकी और न ही पर्याप्त कमरों वाला भवन.

शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

यह मामला सिर्फ एक विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को भी सामने लाता है. जिला मुख्यालय के करीब स्थित स्कूल की ऐसी स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि यदि शहर में यह हाल है तो ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों की स्थिति कैसी होगी. अभिभावकों का कहना है कि जब तक इस विद्यालय को स्थायी भवन और पर्याप्त कक्षाएं नहीं मिलतीं, तब तक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना मुश्किल बना रहेगा.

यह भी पढे़ं: कल्याणपुर: बॉक्स से रुपये निकालने के दौरान सांप ने डसा, इलाज के दौरान महिला की मौत


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prakash kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >