Samastipur News: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU), पूसा के औषधीय एवं सगंध पौधा विभाग के वैज्ञानिक अब किसानों को ‘हरित सोने’ (औषधीय और सुगंधित पौधों) की खेती का गुर सिखा रहे हैं. कुलपति डॉ. पीएस पांडेय ने बताया कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य 2027 तक 10 हजार किसानों को इस मुहिम से जोड़ना है. इसके लिए पूसा में हाईटेक नर्सरी और खरीदार-सम्मेलन कराया जाएगा, ताकि किसानों को कंपनियों से सीधे कॉन्ट्रैक्ट मिल सके और उत्पादों को देश-विदेश में निर्यात किया जा सके. इसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक धान-गेहूं चक्र से निकालकर किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफे वाली खेती की ओर मोड़ना है.
लेमनग्रास और अश्वगंधा से बंपर कमाई, जानवर भी नहीं पहुंचाएंगे नुकसान
विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसके सिंह के अनुसार, बिहार की जलवायु लेमनग्रास, पामारोजा, तुलसी, अश्वगंधा, सतावर, मिंट और जिरेनियम के लिए अनुकूल है. एक एकड़ लेमनग्रास से साल में 4 कटाई कर 80-100 किलो तेल निकलता है, जिससे करीब 1.2 लाख रुपए का शुद्ध सालाना लाभ संभव है. वहीं, अश्वगंधा 6 महीने में 60-70 हजार रुपए प्रति एकड़ मुनाफा देती है. वैज्ञानिक डॉ. दिनेश राय ने बताया कि अश्वगंधा की जड़ें और बीज दोनों बाजार में बिकते हैं. इन फसलों को जानवर नहीं खाते, इन्हें कम पानी चाहिए और भंडारण का झंझट भी नहीं है.
तंबाकू छोड़ पामारोजा अपना रहे किसान, सरकार दे रही 50% सब्सिडी
समस्तीपुर में 200 से अधिक किसानों ने तंबाकू छोड़ पामारोजा की खेती शुरू की है. सरकार भी एमआईडीएच (MIDH) योजना के तहत 50% तक सब्सिडी, फ्री ट्रेनिंग और डिस्टिलेशन यूनिट पर 5 लाख रुपए तक की मदद दे रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान अपनी जमीन के महज 10% हिस्से पर भी औषधीय पौधे उगाएं, तो राज्य का कृषि निर्यात तीन गुना बढ़ जाएगा.
पूसा से सुभाष चंद्र कुमार की रिपोर्ट
