समस्तीपुर सदर अस्पताल: बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सदर अस्पताल समस्तीपुर में पदस्थापित सिविल सर्जन डॉ. राजीव रंजन के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की है. दो वर्षीय एपिडेमिक इंटेलिजेंस सर्विसेज (EIS) प्रशिक्षण पूरा किए बिना बीच में छोड़ने और बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के मामले में विभाग ने उनकी दो वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने की सजा दी है.
2023-25 में प्रशिक्षण के लिए हुआ था चयन
स्वास्थ्य विभाग की अधिसूचना के अनुसार, डॉ. राजीव रंजन को वर्ष 2023-25 के दौरान दो वर्षीय EIS प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए नामांकित किया गया था. प्रशिक्षण के लिए उन्होंने एक हजार रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर गारंटी बॉन्ड भी भरा था.
राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के कार्यपालक निदेशक के 4 अक्टूबर 2024 के पत्र से विभाग को जानकारी मिली कि डॉ. रंजन ने प्रशिक्षण बीच में ही छोड़ दिया है. विभाग ने माना कि इससे सरकारी राशि की क्षति हुई और राज्य को इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए तैयार होने वाले विशेषज्ञ संसाधन से वंचित होना पड़ा.
विभागीय जांच में मुख्य आरोप हुआ प्रमाणित
मामले में स्वास्थ्य विभाग ने चरणबद्ध तरीके से जांच की. 12 मार्च 2025 को डॉ. रंजन को आरोप पत्र भेजकर लिखित जवाब मांगा गया. उनके जवाब की समीक्षा के बाद 11 जुलाई 2025 को औपचारिक विभागीय कार्यवाही शुरू की गयी.
जांच अधिकारी ने प्रशिक्षण अवधि में असंतोषजनक व्यवहार के आरोप को प्रमाणित नहीं माना. हालांकि, प्रशिक्षण बीच में छोड़कर बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के मुख्य आरोप को प्रमाणित पाया गया.
डॉ. रंजन ने बतायी पारिवारिक परिस्थितियां
जांच रिपोर्ट के आधार पर 17 नवंबर 2025 को डॉ. रंजन से अंतिम लिखित अभ्यावेदन मांगा गया. अपने जवाब में उन्होंने बताया कि 29 दिसंबर 2023 से 12 जनवरी 2024 तक उन्होंने NCDC, नई दिल्ली में भौतिक प्रशिक्षण लिया था. इसके बाद उन्हें पटना स्थित SSO में योगदान देने का आदेश मिला.
उन्होंने बताया कि 15 जनवरी से 22 अप्रैल 2024 तक NCDC के वेब पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्रशिक्षण लिया. इसी दौरान उनकी माताजी और पत्नी की तबीयत काफी खराब हो गयी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि SSO की ओर से उन्हें प्रशिक्षण से इतर अन्य कार्यों के लिए बाध्य किया जा रहा था.
22 अप्रैल को प्रशिक्षण से मिली थी मुक्ति
डॉ. रंजन के अनुसार, व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने NCDC से प्रशिक्षण से मुक्त करने का अनुरोध किया था. इसके बाद 22 अप्रैल 2024 को उन्हें प्रशिक्षण से मुक्त कर दिया गया. सिविल सर्जन समस्तीपुर के आदेश के बाद उन्होंने 26 अप्रैल 2024 को सदर अस्पताल में योगदान किया और तब से लगातार सेवा दे रहे हैं.
दो वेतन वृद्धि रोकने की मिली सजा
डॉ. रंजन के स्पष्टीकरण की समीक्षा के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निष्कर्ष निकाला कि एकरारनामा की शर्तों के अनुसार EIS प्रशिक्षण पूरा नहीं करना प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है. इसके बाद बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमावली, 2005 के नियम-14 (5) के तहत दंड दिया गया.
विभाग ने डॉ. राजीव रंजन की दो वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने की शास्ति अधिरोपित की है. इसका अर्थ है कि रोकी गयी वेतन वृद्धि का लाभ भविष्य की वेतन वृद्धि में स्थायी रूप से नहीं जुड़ेगा.
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