Samastipur News:रोसड़ा : जहानाबाद जिले के ऐतिहासिक वाणावर की पहाड़ियों के मध्य आयोजित वाणावर काव्य महोत्सव 6 में रोसड़ा की कवयित्री शेफालिका झा ने अपनी सशक्त साहित्यिक प्रस्तुति से विशेष पहचान बनाई. 18 जनवरी को आयोजित इस प्रतिष्ठित काव्योत्सव में बिहार के विभिन्न जिलों से आये करीब 100 कवियों ने काव्यपाठ किया. जिसमें शेफालिका झा ने अपने जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. काव्य पाठ के दौरान उन्होंने अपनी प्रभावशाली पंक्तियों मगध साहित्य का इतिहास से संवाद की धरती, नमन हे काव्य वाणावर! जहानाबाद की धरती के माध्यम से वाणावर की ऐतिहासिक व साहित्यिक गरिमा को रेखांकित किया. जिस पर सभागार तालियों से गूंज उठा. श्रोताओं के विशेष अनुरोध पर उन्होंने अपनी चर्चित प्रतिनिधि रचना सेल्फी वाली कनिया का पाठ किया. जिसने वाणावर की सुरम्य वादियों में तालियों का महोत्सव सजा दिया. उत्कृष्ट काव्य प्रस्तुति के लिए शेफालिका झा को प्रथम ‘काव्यनूर सम्मान’ से सम्मानित किया गया. इस उपलब्धि को उन्होंने अपने माता-पिता, साहित्यिक गुरुदेव सरोज सिंह परिहार एवं मनोज शुक्ल ‘मनुज’ को समर्पित करते हुए कहा कि उनके आशीर्वाद व प्रेरणा से ही वह काव्य जगत में निरंतर बेहतर कर पा रही हैं. साथ ही उन्होंने अपने प्रांतीय अध्यक्ष प्रभाकर कुमार राय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके सतत प्रोत्साहन को अपनी सफलता का आधार बताया. उल्लेखनीय है कि शेफालिका झा हाल ही में सहरसा से स्थानांतरित होकर शकुबनाम विद्यालय रोसड़ा में अध्यापिका के पद पर पदस्थापित हुई हैं. एक नवाचारी शिक्षिका के रूप में भी जानी जाती हैं. उनकी इस साहित्यिक उपलब्धि पर वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि चांद मुसाफिर, समाजसेवी रामेश्वर पूर्वे, शिक्षक नरेश्वर प्रसाद सिंह, रामपुनीत यादव, अरविंद झा आदि ने बधाई दिया है.
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