समस्तीपुर: स्नातकोत्तर रसायन विभाग के तत्वावधान में बुधवार को 'विश्व ओजोन दिवस' के उपलक्ष्य में 'ग्लोबल एक्शन फॉर कूलर प्लैनेट' विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी का गरिमामय आयोजन किया गया. कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, मां सरस्वती की वंदना और स्वागत गान के साथ संपन्न हुआ. संगोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. शशि भूषण कुमार शशि ने की, जबकि पूरे कार्यक्रम का सफल संयोजन और संचालन विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार सिंह द्वारा किया गया. इस अवसर पर वक्ताओं ने बिगड़ते पर्यावरण और ओजोन परत के क्षरण पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसके संरक्षण के व्यावहारिक उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला.
ओजोन परत है पृथ्वी की ढाल, पराबैंगनी किरणों से बचाव जरूरी: प्राचार्य
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य डॉ. शशि भूषण कुमार शशि ने कहा कि धरती पर संपूर्ण जैविक सभ्यता, वनस्पतियों और मानव जीवन को दीर्घायु व सुरक्षित बनाए रखने के लिए सूर्य की घातक पराबैंगनी (यूवी) किरणों से बचाव नितांत आवश्यक है. ओजोन परत वायुमंडल में एक प्राकृतिक रक्षा कवच बनकर इन किरणों को सोख लेती है और जीवन को सुरक्षित रखती है. वहीं, विषय प्रवर्तन करते हुए रसायन विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि एक स्वस्थ, सुरक्षित और हरित कल की नींव रखने के लिए आज ही ओजोन परत का संरक्षण करना होगा. उन्होंने एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर से निकलने वाली क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) गैस के अंधाधुंध उत्सर्जन को प्रकृति के लिए गंभीर खतरा बताया.
रासायनिक शोध और वैश्विक प्रयासों की सख्त जरूरत: डॉ. बिगन राम
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं अतिथि डॉ. बिगन राम ने अपने संबोधन में रासायनिक, तकनीकी और वैश्विक पर्यावरण संस्थानों की कार्यप्रणाली का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि ओजोन क्षरण को रोकने के लिए केवल सरकारी नीतियां काफी नहीं हैं, बल्कि इसके लिए वैज्ञानिकों को ठोस शोध करने होंगे और आम जनमानस को जागरूक करने के लिए व्यापक स्तर पर सामूहिक प्रयास करने होंगे.
एसी और आधुनिक उपकरणों का सीमित उपयोग करें: डॉ. भावना
विशिष्ट वक्ता के रूप में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (मुजफ्फरपुर) की सहायक प्राध्यापिका डॉ. भावना ने छात्राओं और शिक्षकों को संबोधित किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि ओजोन परत समूची पृथ्वी की जीवनदायिनी चादर है और इसकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक व सामाजिक कर्तव्य है. उन्होंने पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए दैनिक जीवन में एसी, बड़े कूलरों और अन्य आधुनिक शीतलक मशीनों का संयमित, विवेकपूर्ण और न्यूनतम उपयोग करने की अपील की.
राष्ट्रगान के साथ संगोष्ठी का हुआ समापन
इस शैक्षणिक संगोष्ठी में डॉ. राहुल मनहर, डॉ. महेश कुमार चौधरी, डॉ. सफ़वान सफवी, डॉ. दिनेश राय, डॉ. कमलेश कुमार मिश्रा, डॉ. सर्वेश कुमार, योगेंद्र राय, चंद्रशेखर प्रसाद यादव समेत बड़ी संख्या में प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे. कार्यक्रम के अंत में डॉ. कविता रावत ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसके बाद सामूहिक राष्ट्रगान के साथ संगोष्ठी का विधिवत समापन हुआ.
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