Samastipur News:निजी स्कूलों को निर्धारित मानक संचालक प्रक्रिया का पालन जरूरी

जिले में निजी स्कूलों के संचालन के लिए शिक्षा विभाग ने मानक संचालक प्रक्रिया जारी करते हुए सख्ती के साथ लागू करने का निर्देश दिया है.

Samastipur News:समस्तीपुर :

जिले में निजी स्कूलों के संचालन के लिए शिक्षा विभाग ने मानक संचालक प्रक्रिया जारी करते हुए सख्ती के साथ लागू करने का निर्देश दिया है. साथ ही प्रस्वीकृति प्राप्त निजी स्कूलों में सतत माॅनिटरिंग कर इसकी जांच भी कराई जायेगी. डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक निजी विद्यालयों की प्रस्वीकृति (मान्यता) के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तय की है. अब हर स्कूल की मान्यता के लिए जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित होगी. विभाग की यह कवायद नि:शुल्क और अनिवार्य बाल अधिकार अधिनियम के मकसद को पूरा करने के लिए है. प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी एसओपी के अनुसार, कक्षा एक से पांच तक की मान्यता के लिए नामांकित छात्रों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की न्यूनतम संख्या तय की गई है. यदि स्कूल में 60 तक बच्चे नामांकित हैं तो कम से कम दो शिक्षक अनिवार्य होंगे. 61 से 90 बच्चों के लिए तीन शिक्षक, 91 से 120 बच्चों के लिए चार शिक्षक और 121 से 200 बच्चों के बीच नामांकन होने पर पांच शिक्षकों की आवश्यकता होगी. इसके अलावा, 150 बच्चों पर पांच शिक्षक के साथ एक प्रधानाध्यापक की नियुक्ति भी अनिवार्य कर दी गई है. यदि स्कूल में 200 से अधिक बच्चे नामांकित हैं, तो प्रधानाध्यापक को छोड़कर छात्र-शिक्षक अनुपात 40:1 से अधिक नहीं होना चाहिए. वही कक्षा छह से आठ तक के लिए भी निर्देश जारी किए गए है. प्रत्येक कक्षा के लिए कम से कम एक शिक्षक की नियुक्ति जरूरी होगी.

– प्रति सप्ताह 45 घंटे शिक्षण तय, 35 छात्रों पर एक शिक्षक

विज्ञान और गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा विषयों के शिक्षक अनिवार्य किए गए हैं. साथ ही, प्रत्येक 35 छात्रों पर कम से कम एक शिक्षक होना चाहिए. जिन स्कूलों में 100 से अधिक बच्चे नामांकित हैं, वहां पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक की नियुक्ति अनिवार्य होगी. इसके अतिरिक्त, कला शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा तथा कार्य शिक्षा के लिए अंशकालिक शिक्षकों की व्यवस्था भी जरूरी कर दी गई है, ताकि बच्चों का शैक्षणिक के साथ-साथ व्यावहारिक व कलात्मक विकास सुनिश्चित किया जा सके. नई एसओपी के तहत शैक्षणिक सत्र में कार्य दिवस और शिक्षण घंटे भी तय कर दिये गये हैं. कक्षा एक से पांच तक के लिए एक शैक्षणिक सत्र में कम से कम 200 कार्य दिवस और 800 शिक्षण घंटे अनिवार्य होंगे. वहीं, कक्षा छह से आठ के लिए 220 कार्य दिवस और प्रति वर्ष एक हजार शिक्षण घंटे का प्रावधान किया गया है.नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी निजी स्कूल को मान्यता देने से पहले जिला स्तर पर जांच की जायेगी. गठित समिति स्कूल में उपलब्ध शिक्षकों की संख्या, बुनियादी ढांचे, शैक्षणिक संसाधनों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जांच करेगी. समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि स्कूल को मान्यता दी जायेगी या नहीं. इससे यह सुनिश्चित किया जायेगा कि केवल कागजों पर नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति के आधार पर स्कूलों को मान्यता मिले.

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Published by: Krishan mohan pathak

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