Samastipur News:भारतीय सांख्यिकी के अग्रदूत थे पीसी महालनोबिस : प्रो. सुनीता

गणित विभाग द्वारा महान सांख्यिकीयविद प्रो. पीसी महालनोविस के जन्म दिन को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के रूप में मनाया गया.

फोटो संख्या : 4 कार्यक्रम में मौजूद प्रधानाचार्या व अन्य

Samastipur News:समस्तीपुर :

शहर के वीमेंस कॉलेज में प्रधानाचार्या प्रो सुनीता सिन्हा की अध्यक्षता में गणित विभाग द्वारा महान सांख्यिकीयविद प्रो. पीसी महालनोविस के जन्म दिन को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के रूप में मनाया गया. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं प्रो. महालनोबिस के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया. इस अवसर पर गणित एवं अर्थशास्त्र विभाग के छात्राओं द्वारा भाषण प्रतियोगिता, पोस्टर प्रस्तुति एवं पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से सांख्यिकी की उपयोगिता और सतत विकास लक्ष्यों में इसकी भूमिका को रेखांकित किया गया. प्रधानाचार्या प्रो. सिन्हा ने कहा कि अखबारों में हम विभिन्न विषयों पर किये गये सर्वेक्षणों पर आधारित खबरें अक्सर पढ़ते रहते हैं. एक समय ऐसा भी था, जब भारत में सर्वे संबंधी कार्यों और उसके महत्व के बारे में देश के बहुसंख्य लोग परिचित नहीं थे. उस दौर में महालनोबिस ने अपने कार्यों से देश की विकास संबंधी नीतियों के निर्माण में सर्वे की उपयोगिता से लोगों का परिचय कराया. भारतीय सांख्यिकी के अग्रदूत थे पीसी महालनोबिस.

– सांख्यिकी दिवस के रूप में मनाई गई प्रोफेसर पीसी महालनोबिस की जयं���ी

अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ विजय कुमार गुप्ता ने कहा कि सांख्यिकी के क्षेत्र में महालनोबिस ने कुछ ऐसी तकनीकों का विकास किया, जो आगे चलकर सांख्यिकी का अभिन्न हिस्सा बन गईं. आर्थिक योजना व सांख्यिकी विकास के क्षेत्र में महालनोबिस का उल्लेखनीय योगदान रहा है. उनके दूरदर्शी नेतृत्व में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आइएसआइ) और राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) की स्थापना हुई. डॉ रिंकी कुमारी ने कहा कि देश के योजनाबद्ध विकास के लिए प्रतिदर्श सर्वेक्षण पर आधारित आंकड़ा प्रणाली की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. महालनोबिस का दूसरा महत्वपूर्ण योगदान बड़े पैमाने पर नमूना सर्वेक्षण करने के क्षेत्र में है. उन्होंने बंगाल में जूट की फसल के क्षेत्र और उपज के आकलन के लिए नमूना सर्वेक्षण पर अपना काम शुरू किया. कार्यक्रम का संचालन करते हुए गणित विभाग की अध्यक्षा डॉ. संगीता ने कहा कि प्रो. महालनोबिस की भारतीय नियोजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. उनका नियोजन मॉडल एक बहु प्रचलित मॉडल है और यह भारत की द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61) का आधार था. मौके पर प्रो अरुण कुमार कर्ण, प्रो सोनी सलोनी, डॉ नीतिका सिंह, डॉ मधुलिका मिश्रा, डॉ नेहा कुमारी जायसवाल, डॉ सुमन कुमारी, डॉ सुरेश साह, डॉ फरहत जबीन, डॉ कुमारी अनु, डॉ मृत्युंजय कुमार ठाकुर, डॉ अपूर्वा मुले, डॉ मोनी शर्मा, डॉ पिंकी कुमारी, डॉ सोनल कुमारी आदि ने कहा कि महालनोबिस का महान व्यक्तित्व और विभिन्न क्षेत्रों में उनका योगदान सदैव युवाओं का पथ प्रशस्त कर प्रेरणा देता रहेगा. धन्यवाद ज्ञापन गणित विभाग के डॉ. शालिनी कुमारी द्वारा प्रस्तुत किया गया.

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Published by: Ankur kumar

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