समस्तीपुर: बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के फैसले के आलोक में जिला महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों ने सोमवार को एनपीएस के विरोध में काला दिवस मनाया. महासंघ स्थल से आक्रोशपूर्ण जुलूस निकालकर कर्मचारी समाहरणालय पहुंचे और प्रदर्शन किया. कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने और नई पेंशन व्यवस्था को समाप्त करने की मांग की.
1 सितंबर 2005 के फैसले का जताया विरोध
प्रदर्शन का नेतृत्व राजीव रंजन, लक्ष्मीकांत झा और रंजना कुमारी ने किया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 1 सितंबर 2005 को बिहार में एनपीएस लागू करने का फैसला कर्मचारियों के हित में नहीं था. उनके अनुसार यह तारीख कर्मचारियों के लिए काला धब्बा है, जिसने सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा को प्रभावित किया.
महासंघ के जिला मंत्री ने एनपीएस और यूपीएस को लेकर कर्मचारियों के बीच अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि कर्मचारी पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली के लिए आंदोलन जारी रखेंगे.
PFRDA बिल वापस लेने की मांग
जिला मंत्री ने केंद्र सरकार से पीएफआरडीए बिल वापस लेने और एनपीएस के तहत जमा राशि राज्य सरकार को वापस करने की मांग की. उन्होंने कहा कि लाखों कर्मचारियों को एनपीएस में शामिल किया गया और पेंशन को लेकर कर्मचारियों में असुरक्षा की स्थिति बनी है.
उन्होंने सांसदों और विधायकों को मिलने वाली पेंशन का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक सरकारी सेवा करने वाले कर्मचारियों को भी सेवानिवृत्ति के बाद सुनिश्चित पेंशन मिलनी चाहिए.
OPS नहीं मिला तो दिल्ली में आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने पुरानी पेंशन योजना तत्काल लागू नहीं की तो देशभर के कर्मचारी 12 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में जुटेंगे और बड़े आंदोलन का शंखनाद करेंगे.
प्रदर्शन के बाद आयोजित बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष रामनरेश दास ने की. इस दौरान विभिन्न कर्मचारी संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली के समर्थन में अपनी बातें रखीं.
बैठक में बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, बिहार अनुसचिवीय कर्मचारी संघ, बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ, बिहार राज्य पंचायत सेवा संघ, पशुपालन कर्मचारी संघ, पीएचईडी, लेखपाल संघ, कृषि समन्वयक संघ, कोरियर संघ और पीडब्ल्यू सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे.
