Samastipur News:समस्तीपुर : जिले के 16 पंचायतों के 1875 एकड़ में रसायनिक खाद का उपयोग किसान नहीं करेंगे. वे अब प्राकृतिक खेती करेंगे. इन किसानों का 15 कलस्टर तैयार किया गया है, प्रत्येक कलस्टर को 125 एकड़ में प्राकृतिक खेती की स्वीकृति दी गयी है. विदित हो कि जिले के छह प्रखंडों का इसके लिये चयन किया गया था. लेकिन चयनित वारिसनगर प्रखंड रामपुर विशनपुर पंचायत के कृषि समन्वयक द्वारा आवेदन उपलब्ध कराया गया कि वहां के किसान प्राकृतिक खेती करने के लिये इच्छुक नहीं है. उसके बाद कृषि विभाग ने वारिसनगर प्रखंड के रामपुर विशुन पंचायत की जगह माेहनपुर प्रखंड के डुमरी उत्तरी और डुमरी दक्षिणी पंचायत का चयन कर लिया गया है. इसके अलावा मोहिउद्दीनगर प्रखंड के कुरसाहा, हरैल, रासपुर पतसिया पूरब, रासपुर पतसिया पश्चिम, पटोरी प्रखंड के धमौन उत्तरी मोहनपुर प्रखंड के जलालपुर, माधाेपुर सरारी, धरनीपट्टी पश्चिम, विशनपुर बेड़ी, पूसा प्रखंड के चैदौली, समस्तीपुर प्रखंड के चकहाजी, विद्यापतिनगर प्रखंड के बाजितपुर, शेरपुर, बालकृष्णपुर मड़वा तथा मऊधनेशपुर पंचायत को प्राकृतिक खेती के लिये चयनित किया गया है. विदित हो कि प्राकृतिक खेती पूरी तरह रसायन मुक्त खेती है. इसमें पशुधन एकीकृत प्राकृतिक खेती के तौर तरीके और भारतीय पारंपरिक ज्ञान में निहित विविध फसल प्रणालियों को शामिल किया गया है.
– प्रत्येक तीन कलस्टर पर दो जैव उपादान संसाधन केन्द्र किये जायेंगे स्थापित
प्राकृतिक खेती के कई फायदे हैं, इससे मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होगा वहीं अधिक जलवायु लचीलापन के साथ किसान के लिये इनपुट लागत में कमी आयेगी. प्रत्येक तीन कलस्टर पर दो जैव उपादान संसाधन केन्द्र स्थापित किया जाना है. प्राकृतिक खेती में पशुधन मुख्य रूप से गाय की स्थानीय नस्ल, कृषि उपादानों जिसमें बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत, नीमास्त्र, दशपर्णी, बहु-फसल प्रणाली, मानसून पूर्व शुष्क बोआई, बायोमास आधारित मल्चिंग पारंपरिक बीजों का उपयोग किया जाता है. खाद्य पदार्थों की घटती गुणवत्ता, भूमि के नष्ट हो रहे प्राकृतिक गुण को बचाने तथा रसायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग पर रोक लगाने के लिये प्राकृतिक खेती सहायक है. किसानों को प्राकृतिक खेती में सहायता देने के लिये प्रति क्लस्टर दो कृषि सखी रहेगी. कृषि सखी किसानों को प्राकृतिक खेती के लिये प्रशिक्षित भी करेंगे. जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में निगरानी समिति होगी. वहीं प्रखंड स्तर पर बीडीओ की अध्यक्षता में निगरानी समिति होगी. कृषि सखी जीविका की सक्रिय सदस्य होगी. उन्हें प्राकृतिक खेती का कम से कम एक वर्ष का अनुभव होगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
