Samastipur News:विद्यालयों में हो रही निर्धारित वरीयता क्रम की अनदेखी

जिला के माध्यमिक/उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के बीच आपसी वरीयता को लेकर बड़े पैमाने पर मनमानी देखने को मिल रही है.

Samastipur News:समस्तीपुर : जिला के माध्यमिक/उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के बीच आपसी वरीयता को लेकर बड़े पैमाने पर मनमानी देखने को मिल रही है. विद्यालय में विभाग द्वारा निर्धारित वरीयता क्रम की अनदेखी कर चहेते शिक्षकों को लाभ दिये जाने की शिकायत कार्यालय को प्राप्त हो रही है. वरीयता क्रम उल्लंघन के कारण ही जिला में माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रभारी पद पर कहीं भी समरूपता देखने को नहीं मिल रही है. कहीं स्थानीय निकाय के शिक्षक प्रभारी हैं तो कहीं विशिष्ट शिक्षक, कहीं बीपीएससी टीआरई प्रथम तो कहीं टीआरई द्वितीय.जबकि तत्कालीन शिक्षा सचिव बैद्यनाथ यादव ने स्पष्ट करते हुए निदेश दिया था कि पूर्णकालिक एचएम नहीं होने की स्थिति में नियमित शिक्षक, बीपीएससी टीआरई प्रथम, टीआरई द्वितीय, सक्षमता प्रथम उत्तीर्ण विशिष्ट शिक्षक, सक्षमता द्वितीय उत्तीर्ण विशिष्ट शिक्षक, टीआरई तृतीय व स्थानीय निकाय शिक्षकों की वरीयता होगी. विद्यालय में भी प्रधानाध्यापक वरीयता क्रम को नजरअंदाज कर उपस्थिति पंजी, बैंक संचालन में नाम का संधारण कर रहे हैं. जबकि विभाग ने स्पष्टता करते हुए निदेश दिया है कि प्रशिक्षित शिक्षकों के मामले में उनकी नियुक्ति तिथि वरीयता का आधार होगा. अप्रशिक्षित शिक्षक के मामले में प्रशिक्षण उत्तीर्णता की तिथि के आधार पर वरीयता निर्धारित होगी. विद्यालय प्रबंधन कमेटी में भी चक्रानुक्रम में शिक्षक प्रतिनिधि को नामित किये जाने का प्रावधान है. वहीं खाता संचालन में शिक्षक प्रतिनिधि को छोड़कर किसी भी शिक्षक को प्रबंधन कमेटी के प्रस्ताव के उपरांत लिया जाना है. लेकिन जिला शिक्षा विभाग विद्यालय प्रबंधन कमेटी की यदि विहित जांच कराये तो करीब अस्सी प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में नियमों का उल्लंघन होता दिखाई पड़ेगा. वहीं कुछेक एचएम को छोड़कर अधिकांश एचएम शिक्षक प्रतिनिधि को ही खाता संचालन में रखे रहते हैं. उपस्थिति पंजी में भी प्रशिक्षित और अप्रशिक्षित शिक्षक में वरीयता निर्धारण किये बगैर नाम का क्रम संधारित रहता है जिसके कारण विद्यालय में अक्सर विवाद बना रहता है. शिक्षकों का कहना है कि जिला का शिक्षा विभाग विद्यालय की समस्या को दूर करने के लिए स्पष्ट आदेश निर्गत कर देना चाहिए.

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By KRISHAN MOHAN PATHAK

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