गंगा बाढ़ किचन: समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर प्रखंड से होकर बहने वाली गंगा नदी के जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की जा रही है. जलस्तर में सुधार को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने राहत शिविरों और बाढ़ पीड़ितों के लिए चलाए जा रहे सामुदायिक किचन को लेकर बड़ा निर्णय लिया है. प्रखंड प्रशासन ने सोमवार सुबह से चार प्रमुख राहत केंद्रों को छोड़कर शेष सभी सामुदायिक किचन को बंद करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है.
खतरे के निशान से अब भी ऊपर बह रही नदी
मोहनपुर प्रखंड अंतर्गत सरारी कैंप पर तैनात सहायक अभियंता मनीष कुमार गुप्ता ने बताया कि रविवार शाम गंगा का जलस्तर 47.10 मीटर रिकॉर्ड किया गया. यह जलस्तर खतरे के निशान से अभी भी 1.60 मीटर अधिक है, लेकिन नदी की प्रवृत्ति लगातार घटने की बनी हुई है. इससे दियारा और तटीय इलाकों में तेजी से पानी उतर रहा है.
केवल इन चार केंद्रों पर जारी रहेगा भोजन वितरण
अंचलाधिकारी (सीओ) विवेक कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विशेषकर पशुपालकों व अत्यधिक प्रभावित परिवारों की सुविधा के लिए केवल चार स्थानों पर ही सामुदायिक किचन संचालित रहेंगे:
- पशुराम उच्च विद्यालय, नंदनी (पशुपालकों के लिए)
- राजकीय मकतब मस्तलीपुर स्थित स्वामी विवेकानंद आश्रम
- कल्याणपुर बस्ती, पश्चिम चकसाद
- उच्च विद्यालय अंदौर-मदुदाबाद
सीओ ने स्पष्ट किया कि गंगा और बाया नदी में उफान के चलते कई गांवों में पानी भर गया था, जिसके बाद ये किचन शुरू किए गए थे. अब हालात सामान्य होने की ओर हैं.
जलजनित बीमारियों से बचाव में जुटा स्वास्थ्य महकमा
बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया है. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार और मोहनपुर के डॉ. अमित कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए पूरी तरह मुस्तैद है. इसके लिए प्रभावित बस्तियों में ब्लीचिंग पाउडर, चूना और हैलोजन टैबलेट का वितरण व छिड़काव युद्ध स्तर पर किया जा रहा है.
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