Samastipur Agriculture Advisory: बदलते मौसम और खेतों में खड़ी फसलों की स्थिति को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए जरूरी एडवाइजरी जारी की है. विशेषज्ञों के अनुसार इस समय धान, मक्का, कंदवर्गीय फसलों और सब्जियों की बेहतर देखरेख बेहद जरूरी है. समय पर निराई-गुड़ाई, खाद का संतुलित उपयोग और कीटों की निगरानी कर किसान फसल का उत्पादन बढ़ा सकते हैं.
धान में निराई के बाद करें टॉप ड्रेसिंग
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बोई गयी धान की फसल में समय पर निराई-गुड़ाई करने की सलाह दी है. खेत से खरपतवार पूरी तरह हटाने के बाद प्रति हेक्टेयर 20 किलोग्राम नाइट्रोजन का टॉप ड्रेसिंग करने को कहा गया है.
धान की फसल में तना छेदक और पत्ती लपेटक जैसे कीटों पर भी नजर रखने की सलाह दी गयी है. खेतों की नियमित निगरानी करें और कीट के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों की अनुशंसा के अनुसार कीटनाशक का प्रयोग करें.
मक्का में खरपतवार हटाना जरूरी
मक्का की फसल में भी कतारों के बीच खुरपी से निकोनी कर खरपतवार निकालने की सलाह दी गयी है. खरपतवार नियंत्रण के बाद प्रति हेक्टेयर 40 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग करने को कहा गया है.
विशेषज्ञों के अनुसार खेत में पर्याप्त नमी रहने पर पौधों की जड़ों पर मिट्टी चढ़ाना भी जरूरी है. इससे तेज हवा चलने की स्थिति में मक्का के पौधों के गिरने की आशंका कम होती है.
कंदवर्गीय फसलों में जलजमाव से बचें
शकरकंद और मिश्रीकंद जैसी कंदवर्गीय फसलों के लिए स्थानीय जलवायु के अनुकूल और रोग प्रतिरोधी उन्नत किस्मों का चयन करने की सलाह दी गयी है. कंदों के बेहतर विकास के लिए पोटाश और फास्फोरस की संतुलित मात्रा का इस्तेमाल करना चाहिए.
विशेषज्ञों ने खेत में पानी जमा नहीं होने देने को भी जरूरी बताया है. जलजमाव होने पर कंदों के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है.
सब्जियों में जलनिकासी पर दें ध्यान
मौसम में बदलाव को देखते हुए सब्जी उत्पादक किसानों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गयी है. बैंगन, मिर्च, टमाटर और भिंडी जैसी फसलों में जलजमाव नहीं होने देना चाहिए.
खेत में जलनिकासी की उचित व्यवस्था रखने के साथ कीट और फफूंदजनित रोगों की नियमित निगरानी करें. समस्या दिखाई देने पर फसल की स्थिति के अनुसार जैविक या रासायनिक नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी गयी है.
वैज्ञानिक प्रबंधन से बढ़ेगा उत्पादन
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान मौसम में किसानों को फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए. खरपतवार नियंत्रण, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जलनिकासी और समय पर कीट नियंत्रण जैसे उपाय अपनाकर फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है. किसानों को किसी भी दवा या रसायन के प्रयोग से पहले अनुशंसित मात्रा और विशेषज्ञों की सलाह का पालन करना चाहिए.
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