Samastipur News:किसान गेहूं व रबी मक्का की करें बोआई, मौसम व तापमान अनुकूल

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को गेहूं, रबी मक्का, आलू की फसलों की बोआई व रोपाई का सुझाव दिया है.

Samastipur News:समस्तीपुर : डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को गेहूं, रबी मक्का, आलू की फसलों की बोआई व रोपाई का सुझाव दिया है. कहा कि इन फसलों की बोआई व रोपाई के लिये मौसम पूरी तरह अनुकूल है. कहा कि गेहूं की बोआई के लिए तापमान अनुकूल हो गया है. किसान इसकी बोआई शुरू करें. खेत की तैयारी के समय 150 से 200 क्विटल कम्पोस्ट, 60 किलोग्राम नेत्रजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस तथा 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टयेर की दर से व्यवहार करें. बोआई के लिये एचडी-2967, एचडी-2733, एचडी-2824, डीडब्लू-187, डीडब्लू-39, एचयूडब्ल्यू -468, सीबीडब्लू-38 किस्में उत्तर बिहार के लिये अनुशंसित है. बीज को बोआई से पहले 2.5 ग्राम बेबीस्टीन की दर से प्रति किलोग्राम बीज को उपचारित करें. छिटकबां विधि से बोआई के लिए प्रति हेक्टयेर 125 किलोग्राम तथा सीड ड्रील से पंक्ति में बोआई के लिये 100 किलोग्राम बीज का व्यवहार करें. बीज के अच्छे जमाव के लिए खेत में नमी का होना आवश्यक है.किसान रबी मक्का की बोआई करें. इसके लिए संकर किस्में शक्तिमान-1 सफेद, शक्तिमान-2 सफेद, शक्तिमान-3 पीला, शक्तिमान 4 पीला, शक्तिमान-5 पीला, गंगा 11 नारंगी पीला, राजेन्द्र संकर मक्का-1, राजेन्द्र संकर मक्का 2 एवं राजेन्द्र संकर मक्का दीप ज्वाला तथा संकुल किस्में देवकी सफेद, लक्ष्मी सफेद एवं सुआन पीला इस क्षेत्र के लिए अनुशंसित है. खेत की जुताई में 100-150 क्विटंल कम्पोस्ट, 60 किलोग्राम नेत्रजन, 75 किलोग्राम फॉस्फोरस तथा 50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टर की दर से व्यवहार करें. बीज दर 20 किलोग्राम प्रति हेक्टयेर तथा दूरी 60 गुणा 20 सेमी रखें. किसान आलू की रोपाई करें. कुफरी चन्द्रमुखी, कुफरी अशोका, कुफरी बादशाह, कुफरी ज्योति, कुफरी सिंदुरी, कुफरी अरुण, राजेन्द्र आलू-1, राजेन्द्र आलू- 2 तथा राजेन्द्र आलू-3 इस क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्में है. बीज दर 20-25 क्विटंल प्रति हेक्टयेर रखें. पंक्ति से पंक्ति की दूरी 50 से 60 सेमी एवं बीज से बीज की दूरी 15-20 सेमी रखें.आलू को काट कर लगाने पर 2 से 3 स्वस्थ आंख वाले टुकडे को उपचारित कर 24 घंटे के अन्दर लगावें. बीज को एगलाॅल या एमीसान के 0.5 प्रतिशत घोल या डाइथेन एम-45 क े0.2 प्रतिशत घोल में 10 मिनट तक उपचारित कर छाया में सुखाकर रोपनी करें. समूचा आलू (20-40 ग्राम) लगाना श्रेष्ठकर है. खेत की जुताई में कम्पोस्ट 200-250 क्विटल, 75 किलोग्राम नेत्रजन, 90 किलोग्राम फॉस्फोरस एवं 100 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करें. चना की बोआई के लिये मौसम अनुकूल हो रहा है.बोआई के समय 20 किलोग्राम नेत्रजन, 45 किलोग्राम फॉस्फोरस, 20 किलोग्राम पोटास तथा 20 किलोग्राम सल्फर प्रति हेक्टयेर की दर से व्यवहार करें. चना के लिए उन्नत किस्म पूसा-256, केपीजी-59(उदय) एवं पूसा-372 अनुशंसित है. बीज को बेबीस्टीन 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से उपचारित करें. 24 घंटा बाद उपचारित बीज को कजरा पिल्लू से बचाव हेतु क्लोरपाईरीफॉस 8 मिली प्रति किलोग्राम की दर से मिलावें. पुन: 4 से 5 घंटे छाया में रखन के बाद राईजोबीयम कल्चर (पांच पैकेट प्रति हेक्टयेर) से उपचारित कर बोआई करें. मसूर के मल्लिका(के-75), अरुण (पीएल 77-12), बीआर-25 केएलएस- 218, एचयूएल-57, पीएल-5 एवं डब्लूवीएल- 77 किस्मों की बोआई करें. बोआई के समय खेत की जुताई में 20 किलोग्राम नेत्रजन, 45 किलोग्राम फॉस्फोरस, 20 किलोग्राम पाेटास तथा 20 किलोग्राम सल्फर का व्यवहार करें. बोआई के 2-3 दिन पूर्व कार्बेंडाजीम फूंदनाशक दवा का 1.0 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से शोधित करें. तत्पश्चात कीटनाशी दवा क्लोरपाईरीफॉस 20 ईसी का 8 मिली प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें. बोआई के ठीक पहले ेउपचारित बीज को उचित राईजोबियम कल्चर (5 पैकेट प्रति हेक्टेयर) से उपचारित कर बोआई करें. वैज्ञानिक ने कहा है कि विगत माह बाेयी गई मटर, राजमा, लहसून तथा सब्जियों वाली फसलें बैगन, टमाटर, मिर्च, पत्तागोभी तथा फूलगोभी की निकाई गुराई तथा आवश्यकतानुसार सिंचाई करें. सब्जियों में कीट- व्याधि की निगरानी करें. प्याज की स्वस्थ्य पौध के लिए पौधशाला से प्रत्येक 10 से 12 दिनों के अन्तराल में खरपतवार निकाल कर हल्की सिंचाई करें.

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