Samastipur News:किसानों को सोच में परिवर्तन लाने की जरूरत : डॉ. रामसुरेश

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थित सेंटर फॉर एक्सीलेंस के सभागार में मिलेट्स के बीज उत्पादन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ

पूसा: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थित सेंटर फॉर एक्सीलेंस के सभागार में मिलेट्स के बीज उत्पादन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ. अध्यक्षता करते हुए कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रामसुरेश ने कहा कि आधुनिक कृषि को अपनाने के लिए किसानों के अपनी सोच में परिवर्तन लाने की जरूरत है. जलवायु परिवर्तन के दौर में तकनीकों में हो रहे बदलाव से किसानों को लाभ लेने की जरूरत है. स्वरोजगार की दिशा में ग्रामीण महिलाएं अव्वल होती है. खासकर मिलेट्स उत्पादन एवं इसके बीज निर्माण में महिलाओं की महती भूमिका है. परंपरागत काल में भी मरूआ, सांमा, कौनी एवं बाजरा की खेती कर बड़े ही शौक से लोग खाने में उपयोग करते थे. देश में लोगों को बढ़ते हुए कुपोषण के दौरान बेहतर स्वास्थ्य की चिंता परेशानी का सबब बनते जा रहा है. इस परेशानी से निपटने के लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकार पंजीकृत निजी संगठनों के साथ जुड़कर दर्जनों परियोजना के माध्यम से मिलेट्स उत्पादन की दिशा में किसानों के खेत में बेहतर अनुसंधान कर किसान हित में कार्य किया जा रहा है. डब्लूएचओ के एक आंकड़े के अनुसार विश्व स्तर पर मानवीय रोगों की संख्या सतत बढ़ते जा रहा है. खासकर बिहार में ग्रामीण महिलाएं एवं मासूम बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे रहे हैं. वैज्ञानिक सतत इस दिशा में बेहतर शोध कर रहे हैं.

मिलेट्स के तरफ देश के युवा युवतियों का झुकाव देखा जा रहा है

इसी कड़ी में मिलेट्स के तरफ देश के युवा युवतियों का झुकाव देखा जा रहा है. वह समय आ गया है, जिसमें अब मिलेट्स का उत्पाद या व्यंजन नामीगिरामी फाइव स्टार होटल में भी परोसा जा रहा है. देश की कुल आबादी के करीब 70 प्रतिशत लोग कृषि पर आधारित होकर गांव में ही रहते हैं. शेष बचें 30 प्रतिशत की आबादी इन्हीं गांव में बसर करने वाले लोगों पर पूर्णरूप से निर्भर रहते हैं. किसानों को रासायनिक खादों से बचने की जरूरत है. विकल्प के रूप में जैविक खाद के सहारे प्राकृतिक खेती को अपनाने की आवश्यकता है. प्रशिक्षण का विषय प्रवेश कराते हुए परियोजना के मुख्य अन्वेषिका सह वैज्ञानिक डॉ. श्वेता मिश्रा ने कहा कि मिलेट्स के बीज निर्माण में जीविका का आउटलेट पर चल रहे कार्य महत्वपूर्ण है. गुणवत्तापूर्ण बीज के निर्माण से ही बेहतर बाजार की परिकल्पना की जा सकती है. मिलेट्स का फसल एवं बीज उत्पादन में तकनीकों का अंतर है. उसे प्रशिक्षण में समझने की जरूरत है. स्वागत भाषण सह संचालन वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार श्रीवास्तव ने किया. धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक डॉ. कौशल किशोर ने किया. मौके पर वैज्ञानिक डॉ. मीनाक्षी द्विवेदी सहित केंद्र से जुड़े सभी कर्मी मौजूद थे.

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By Prabhat Khabar News Desk

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