Parthenium Weed Control: डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) जाले के तत्वावधान में नरौछ गांव में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मृदा एवं जल अभियंत्रण विशेषज्ञ इं. निधि कुमारी के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों और ग्रामीणों को गाजर घास (पार्थेनियम) के गंभीर दुष्प्रभावों, उसकी सही पहचान और प्रभावी नियंत्रण विधियों के प्रति जागरूक करना था.
फसल, पशु और मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है गाजर घास
कार्यक्रम के दौरान इं. निधि कुमारी ने बताया कि गाजर घास अत्यंत आक्रामक और तेजी से फैलने वाला खरपतवार है. यह खेतों, सड़क किनारे, नहरों और खाली जमीनों पर तेजी से उग जाता है. उन्होंने इसके प्रमुख नुकसान गिनाए:
- कृषि उत्पादकता पर असर: यह मुख्य फसलों के साथ जल, धूप और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा करता है, जिससे फसल की पैदावार घट जाती है.
- मानव स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव: इसके संपर्क में आने से मनुष्यों में चर्म रोग, त्वचा में तेज खुजली, एलर्जी और सांस से जुड़ी समस्याएं (अस्थमा) हो सकती हैं.
- पशुओं को नुकसान: पशुओं द्वारा इसे चरने पर उनके स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.
फूल आने से पहले सुरक्षित निपटान बेहद जरूरी
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि गाजर घास में फूल और बीज बनने से पहले ही इसे जड़ से उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिए, ताकि इसके बीजों का प्रसार रोका जा सके.
- यांत्रिक विधि: दस्ताने पहनकर हाथ से निराई करें और फूल आने से पूर्व सुरक्षित रूप से जला दें या गड्ढे में दबा दें.
- रासायनिक विधि व निगरानी: विशेषज्ञ सलाह अनुसार उपयुक्त कीटनाशक का प्रयोग करें और खेत व मेड़ों की नियमित निगरानी रखें.
इस मौके पर प्रगतिशील किसान राघवेंद्र समेत 20 से अधिक किसानों ने भाग लिया और अपने क्षेत्रों को गाजर घास मुक्त बनाने का संकल्प लिया.
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