Samastipur News:एक दशक बीत गए नहीं चालू हुआ प्रखंड क्षेत्र का तीन पुल

एक दशक बीत जाने के बाद भी प्रखंड क्षेत्र के तीन पुलों का निर्माण कार्य अधूरा है. प्रखंड क्षेत्र के राजवाड़ा चकपहाड़ और गुनाई बसही में बना पुल लोगों के लिए अभी चालू नहीं हो सका है.

Samastipur News: मोरवा : एक दशक बीत जाने के बाद भी प्रखंड क्षेत्र के तीन पुलों का निर्माण कार्य अधूरा है. प्रखंड क्षेत्र के राजवाड़ा चकपहाड़ और गुनाई बसही में बना पुल लोगों के लिए अभी चालू नहीं हो सका है. बताया जाता है कि एक प्रतिनिधि के द्वारा इसे बनाया गया तो दूसरे प्रतिनिधि के द्वारा इसे चालू करने का भरोसा दिया गया. अब जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर क्यों नहीं चालू हुआ इतने दिन में पुल और कब होगा. इस पर आवागमन चालू लेकिन समस्या ऐसी है कि कोई भी जनप्रतिनिधि इसका जवाब देने में अपने आप को सक्षम नहीं पा रहे हैं. पुलों के निर्माण कार्य पूरा होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि समस्तीपुर और वैशाली जिले का सीधा कनेक्टिविटी होगा और तेजी से क्षेत्र का विकास होगा. लोगों को पगडंडी से निजात मिलेगा और बड़ी गाड़ियां पंचायत तक पहुंचेगी जिससे की पंचायत का विकास तेजी से होगा लेकिन ऐसा सपना पूरा नहीं हुआ और 10 साल बीत गए लेकिन अब तक तीनों पुल के निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद आवागमन चालू नहीं हुआ. विदित हो कि करीब पांच करोड़ की लागत से पुल का निर्माण हुआ था. बताया जाता है कि पुल के निर्माण का पूरा होने के बाद अप्रोच पथ के लिए लगातार पहल किए जाने की बात बताई जा रही है लेकिन न जाने मामला किस पेंच में फंसा है. प्रशासन के लोग इस तरफ क्यों उदासीन बने हुए हैं. अब जब चुनाव सिर पर है तो जनता जनप्रतिनिधियों और अधिकारी से सवाल पूछ रही है कि आखिर क्यों नहीं इतने दिन में पुल चालू हुआ जबकि आवंटित राशि खर्च होने के बाद पुल के निर्माण के पूरा होने के लिए एप्रोच पथ जरूरी था. दर्जन भर अधिकारियों के द्वारा लगातार इसका निरीक्षण किया जाता रहा और एप्रोच पथ के लिए जमीन अधिग्रहण की बात होती रही लेकिन एक दशक बीत गया मामला फाइल में तब कर रह गया. अब लोग उसी पुराने जर्जर पुल से जाने को विवश हैं, क्योंकि नए पुल के निर्माण पूरा होने के बाद भी इस पर यातायात चालू होने के आसार फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं. अब चुनाव के बाद जो भी प्रतिनिधि चुनकर आएंगे उनके लिए पहली जिम्मेदारी होगी कि इस महत्वाकांक्षी पुल का निर्माण कार्य पूरा करते हुए क्षेत्र के लोगों के सौगात दें. लेकिन फिलहाल जब जनता इस बाबत सवाल करती है तो जनप्रतिनिधि बगले झांकने लगते हैं और कमी का ठीकरा अधिकारियों पर फोड़ रहे हैं. हकीकत यह है कि अब तक जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है, जिसके कारण मामला और पेंचीदा होता नजर आ रहा है. क्योंकि जमीन वाले अपना जमीन देने को तैयार नहीं क्योंकि उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिल रहा है. ऐसे में करोड़ों की लागत से बना पुल लोगों को बरसों से मुंह चिढ़ा रहा है.

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