Tissue Culture Sugarcane: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा परिसर स्थित ईंख अनुसंधान संस्थान (एसआरआई) में स्थापित टिशू कल्चर लैब के सुदृढ़ीकरण की कवायद तेज हो गई है. बिहार सरकार ने अपनी विशेष परियोजना के तहत आगामी पांच वर्षों के लिए 92.10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है. इस योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में 19.17 लाख रुपये की निकासी कर विकास कार्यों पर खर्च किए जाएंगे. इस कदम से राज्य में गन्ने के उन्नत बीज उत्पादन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
उत्पादन क्षमता दोगुनी करने का लक्ष्य
परियोजना के मुख्य उद्देश्यों की जानकारी देते हुए ईंख विकास पूसा के उप निदेशक डॉ. धर्मवीर सिंह ने बताया कि प्रयोगशाला के आधुनिकीकरण के बाद इसकी उत्पादन क्षमता में भारी इजाफा होगा.
- क्षमता विस्तार: लैब की वर्तमान उत्पादन क्षमता 2 लाख पौधे प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 4 लाख पौधे प्रतिवर्ष की जाएगी.
- नाभिकीय बीज उत्पादन: यहां तैयार किए गए टिशू कल्चर बिचड़ों का इस्तेमाल सीधे तौर पर नाभिकीय बीज तैयार करने में होगा.
- आधुनिक यंत्रों की खरीद: लैब में जो आवश्यक वैज्ञानिक उपकरण मौजूद नहीं हैं, उनकी नई खरीद की जाएगी.
- रखरखाव व ट्रेनिंग: पुराने यंत्रों के मेंटेनेंस के साथ-साथ लैब कर्मियों को आधुनिक तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा.
वैज्ञानिकों ने किया लैब का गहन निरीक्षण
परियोजना को गति देने के लिए उप निदेशक डॉ. धर्मवीर सिंह ने अपनी तकनीकी टीम के साथ लैब के मौजूदा उपकरणों का बारीकी से निरीक्षण किया. एसआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीएन कामत ने बताया कि सरकारी फंड से आवश्यक संसाधनों की कमी दूर होगी. यह परियोजना बिहार में गन्ने की खेती और उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन में मील का पत्थर साबित होगी. निरीक्षण के दौरान विभाग के उच्चवर्गीय लिपिक सुधीर प्रसाद शाही भी मौजूद रहे.
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