Samastipur News: डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित ईख अनुसंधान संस्थान के सभागार में सिंगल बड प्लांटेशन पर आधारित गन्ना नस्लों की स्थापना एवं नर्सरी संचालन के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण की शुरुआत हुई. उद्घाटन सत्र में वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को गन्ने की आधुनिक खेती, गुणवत्तापूर्ण बीज और नर्सरी प्रबंधन की तकनीक की जानकारी दी. प्रशिक्षण में 62 किसान शामिल हुए, जिनमें 20 किसानों का नर्सरी लगाने के लिए चयन किया गया.
गन्ने की खेती में गुणवत्तापूर्ण बीज पर दिया जोर
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए निदेशक अनुसंधान डॉ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि ईख अनुसंधान संस्थान वर्ष 1932 से स्थापित है. गन्ने से चीनी बनाने का कार्य बिहार राज्य से ही शुरू हुआ था. उन्होंने कहा कि गन्ना उत्पादन के क्षेत्र में बीज का महत्वपूर्ण स्थान है. किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक अपनाकर उत्पादन और आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.
बिहार में 25 चीनी मिल स्थापित करने का लक्ष्य
डॉ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि गन्ना उत्पादकों के उत्थान के लिए बिहार सरकार प्रतिबद्ध है. सरकार के विजन के अनुसार बिहार में 25 चीनी मिल स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है. कृषि को आधुनिकता प्रदान कर किसानों की आय में वृद्धि करने की दिशा में वैज्ञानिक और सरकार लगातार काम कर रहे हैं.
सिंगल बड प्लांटेशन से कम लागत में बेहतर आय
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ रत्नेश कुमार झा ने कहा कि गन्ना उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए तकनीक के साथ नर्सरी प्लांटेशन की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है. गन्ना उत्पादन बढ़ाने के साथ घटता कृषि क्षेत्र चुनौती बना हुआ है. उन्होंने कहा कि गन्ना उत्पादन में करीब एक तिहाई खर्च बीज पर होता है. सिंगल बड प्लांटेशन से कम लागत में बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है.
घर पर तैयार होंगे पांच लाख गन्ने के पौधे
स्वागत भाषण में उप निदेशक, जिला गन्ना उद्योग विभाग धर्मवीर सिंह ने कहा कि किसानों को सिंगल बड प्लांटेशन के बारे में विस्तार से जानने और समझने की जरूरत है. इससे वे गांव पहुंचकर तकनीकी तरीके से गन्ने की पौध तैयार कर सकेंगे. उन्होंने बताया कि योजना के तहत अपने घर पर पांच लाख गन्ने के पौधे तैयार करने का लक्ष्य है. गन्ने के क्षेत्र में यंत्रीकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है.
62 किसानों में 20 का नर्सरी के लिए चयन
वैज्ञानिक डॉ बलवंत कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण में शामिल 62 किसानों में से 20 किसानों का फिलहाल नर्सरी लगाने के लिए चयन किया गया है. नर्सरी प्रबंधन में वैज्ञानिक विधि अपनाने से सुरक्षित और संरक्षित प्लांटेशन किया जा सकता है. रेमंत झा ने कहा कि बेहतर बीज से ही उन्नत और लाभकारी गन्ने की खेती संभव है.
वैज्ञानिक विधि से खेती पर अधिक उत्पादन का जोर
वैज्ञानिक डॉ सुनीता कुमारी मीणा ने कहा कि गन्ने की खेती वैज्ञानिक विधि से करने पर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे किसानों की आमदनी बेहतर होगी. प्रशिक्षण का संचालन उन्होंने किया. धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक डॉ एसएन सिंह ने किया. मौके पर वैज्ञानिक डॉ मो मिन्नीतुल्लाह, डॉ नवनीत कुमार, ईख उद्योग पूसा से विकास कुमार समेत सभी प्रतिभागी मौजूद थे.
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