Bihar/Samastipur News:पूसा : डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित संचार केंद्र के पंचतंत्र सभागार में मधुमक्खी एवं मत्स्यपालन विषय पर अलग-अलग तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ. अध्यक्षता करते हुए डीएसडब्लू डॉ रमण त्रिवेदी ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य महज उत्पादन के तकनीकों को बताना ही नहीं बल्कि इससे जुड़े व्यवसाय करने के लिए किसानों को मोटिवेट करना है. प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि मधुमक्खी एवं मत्स्यपालन के विभिन्न अवयवों के बारे में विशेषज्ञों से समझबूझ कर उस व्यवसाय की ओर बढ़ने की आवश्यकता है. मधुमक्खीपालन के दौरान रानी मक्खी, शहद, मोम, डंक विष आदि पर बेहतर रूप से कार्य करने की जरूरत है. इसके साथ प्रसंस्करण, विपणन एवं बाजारीकरण के ऊपर ध्यान देने की जरूरत होती है. ठीक उसी तरह मत्स्यपालन में मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ मत्स्य की प्रसंस्करण उसका विपणन एवं बाजारीकरण के अलावा कोल्ड चेन पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है. मत्स्यपालन से जुड़े व्यवसाय के लिए मत्स्य बीज, मत्स्य का फीड, मत्स्य के उपयोगी दवा के अलावा रंगीन मछलियों का व्यवसाय लाभकारी है. इससे व्यक्ति के आर्थिक विकास के साथ राज्य एवं देश में भी समृद्धि आयेगी. इससे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य प्राप्त करने में भी मददगार साबित होगा. सत्र के दौरान मत्स्य वैज्ञानिक डॉ शिवेंद्र कुमार ने विषय वस्तु पर प्रकाश डाला. संचालन विभागाध्यक्ष सह ट्रेनिंग कॉर्डिनेटर डॉ बिनीता सतपथी ने किया. धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक डॉ फूलचंद ने किया. मौके पर टेक्निकल टीम के सुरेश कुमार आदि मौजूद थे.
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