Samastipur News:समस्तीपुर : बच्चों के समग्र शैक्षणिक विकास के लिए उनके स्वास्थ्य एवं पोषण-स्तर की सकारात्मक भूमिका होती है. इसी उद्देश्य से सरकारी स्कूलों में स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम चलाया जायेगा. इस प्रोग्राम के तहत छात्रों को बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण दिया जाएगा. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयुष्मान भारत कार्यक्रम के तहत स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया गया है. स्कूलों के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग द्वारा अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित किया जायेगा. शिक्षा विभाग के एसीएस ने आयुष्मान भारत के अंतर्गत विद्यालय स्वास्थ्य एवं आरोग्य कार्यक्रम आधारित सत्रों का कक्षा छह से बारहवीं तक के विद्यालयों में आयोजन करने व सीएएचपी मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से मासिक प्रतिवेदन अद्यतन करने का निर्देश दिया है. डीपीओ एसएसए जमालुद्दीन ने बताया कि सूबे के 32 जिलों में आयुष्मान भारत के तहत यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है. जबकि समस्तीपुर सहित 6 अन्य जिलों में वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह कार्यक्रम चलेगा. इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूल जाने वाले बच्चों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जागरुकता पैदा करना और विद्यालय स्तर पर संचालित स्वास्थ्य गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है.
बुधवार को होगी गतिविधि
स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रत्येक विद्यालय से दो शिक्षकों को हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर बनाया जायेगा. इनमें एक शिक्षक व एक शिक्षिका शामिल होगी. इन्हें स्वास्थ्य व्यवहार को बढ़ावा देने और रोगों के रोकथाम के लिए प्रशिक्षित किया जायेगा. हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर प्रत्येक सप्ताह में एक घंटा रोचक गतिविधियों के माध्यम से सत्र आयोजित करेंगे. प्रत्येक कक्षा से दो नामित छात्र स्वास्थ्य से संबंधित संदेशों को समाज तक पहुंचाने के लिए हेल्थ एंड वेलनेस मैसेंजर के रूप में काम करेंगे. विद्यालय में प्रत्येक बुधवार को हेल्थ एंड वेलनेस डे का आयोजन किया जायेगा. छात्रों को दी जायेगी आयरन की गोली एनिमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत बच्चों को एनिमिया या इससे होने वाली समस्याओं से बचाने के लिए साप्ताहिक आयरन फॉलिक-एसिड अनुपूरण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम के तहत प्राथमिक विद्यालयों में पांच से नौ वर्ष के छात्रों को प्रत्येक बुधवार के दिन आयरन की गुलाबी गोली का सेवन कराया जाएगा. छात्रों के मिड डे मिल लेने के बाद क्लास टीचर आयरन की गोली खिलायेंगे. वही माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में दस से उन्नीस वर्ष के किशोर और किशोरियों को सप्ताह में एक बार सुबह प्रार्थना के बाद शिक्षकों के द्वारा आयरन की नीली गोली का सेवन कराया जायेगा. इस योजना के तहत विद्यालय के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के छह से 19 वर्ष तक के छात्रों को लक्षित किया गया है. आरोग्य दूत प्रशिक्षण के लिए राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद ने मापदंड तय किया है. जिसमें कहा गया है कि शिक्षक शिक्षिका को पांच दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा. संचार कौशल क्षमता वाले बच्चों के साथ सरोकार स्थापित करने वाले एवं स्थानीय भाषा पर पकड़ रखने वाले शिक्षकों का ही चयन इसके लिए किया जाएगा. इसके अलावा विज्ञान एवं शारीरिक शिक्षक को प्राथमिकता देने एवं 50 साल से कम उम्र के शिक्षकों का चयन की बात कही गई है. बच्चों को निरोग रखने के लिए सभी स्कूलों में साल में एक बार कैंप लगाकर वहां के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाती है. इस दौरान कुपोषण या अन्य बीमारी मिलने पर उसका इलाज भी किया जाता है.
इन बिंदुओं पर दिया जायेगा प्रशिक्षण
आरोग्य दूत को 11 अलग-अलग बिंदुओं पर प्रशिक्षण दिया जा जायेग. इसमें बच्चों को स्वस्थ रहने को बढावा देना, भावनात्मक व मानसिक स्वास्थ्य, परास्परिक संबंध, मूल्य और जिम्मेदार नागरिकता, जेंडर समानता, पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता, पदार्थ के दुरुपयोग की रोकथाम व प्रबंधन, स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देना, प्रजनन स्वास्थ्य और एचआईवी की रोकथाम, हिंसा और चोट के खिलाफ सुरक्षा व इंटरनेट और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देना शामिल हैं.
इनसेट::::::::::::::::::::आयोजित होगी यह गतिविधियां
प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा स्वस्थ व्यवहार को बढ़ावा और बीमारियों की रोकथाम के लिए आयु विशेष शिक्षा प्रदान करना.राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाइल टीम के माध्यम से चिन्हित स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान व समाधान करना.
साप्ताहिक आयरन एंव फॉलिक एसिड अनुपूरण कार्यक्रम एंव राष्ट्रीय कृमि दिवस कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को आईएफए एवं एल्बेन्डाजोल की गोलियों का सेवन सुनिश्चित करवाना.सैनिटरी नैपकिन की व्यवस्था एवं आयु विशेष के लिए टीकाकरण का प्रबंध करना.
विद्यार्थियों को बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण प्रदान.प्रत्येक बच्चे का इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड संधारित करना.
कार्यक्रम की प्रगति से संबंधित प्रतिवेदन संबंधित अधिकारी को नियमित रूप से भेजनाडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
