Samsatipur : वैश्विक पहचान दिला रहा केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय

1905 में पूसा में इंपीरियल एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (जो अब भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का हिस्सा है) की स्थापना हुई.

Samsatipur : पूसा . डा राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित स्टड फार्म का ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान संदर्भ पूसा स्टड फार्म का उल्लेख उस समय के ब्रिटिश दस्तावेजों में मिलता है. जब यह घोड़ों के प्रजनन और प्रशिक्षण का एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था. 19वीं सदी के प्रारंभ से ही यहां का कार्य और अनुसंधान क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति को मजबूत करने में सहायक था. बाद में 1905 में पूसा में इंपीरियल एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (जो अब भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का हिस्सा है) की स्थापना हुई. जिसने इस क्षेत्र को कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में प्रसिद्धि दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका थे. वर्तमान पूसा, समस्तीपुर में जागृति का संदेशविलियम मूरक्रॉफ्ट और विलियम फ्रेजर जैसे व्यक्तियों के कार्यों से प्रेरणा लेकर, वर्तमान पूसा (समस्तीपुर) के निवासी अपने ऐतिहासिक गौरव को पुनर्जनन कर सकते हैं. पूसा का इतिहास न केवल पशुपालन और कृषि अनुसंधान से जुड़ा है, बल्कि यह एक ऐसी भूमि है. जहां परंपरा और आधुनिकता का संगम हुआ है. फिलवक्त बिहार का धरोहर राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय भारत सरकार एवं बिहार सरकार के अथक प्रयास से परिवर्तित होकर डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय इस क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिला रहा है. कुलपति डा पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडेय के अथक प्रयास एवं समुचित मार्गदर्शन में कर्मठ वैज्ञानिकों की टीम सतत नये शोध एवं तकनीक विकसित कर देश के किसानों के विकास के लिए दृढ़संकल्पित हैं. स्थानीय समुदाय को इस इतिहास से प्रेरणा लेकर शिक्षा, प्रसार एवं अनुसंधान, और पशुपालन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने की जरूरत है. ताकि पूसा का नाम फिर से विश्व पटल पर अपना पहचान बनाकर किसानों को नवीनतम तकनीकों से लाभान्वित कर सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By DIGVIJAY SINGH

DIGVIJAY SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >