सहयोग शिविर मोरवा: समस्तीपुर जिले के मोरवा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बाजितपुर करनैल पंचायत में आयोजित प्रशासनिक सहयोग शिविर सरकारी दावों के उलट महज कागजी खानापूर्ति साबित हो रहा है. पांच अगस्त को आयोजित शिविर में ग्रामीणों ने विकराल पेयजल संकट को लेकर एडीएम राजेश कुमार सिंह के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम ने पीएचईडी (लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) के जेई को मौके पर तलब कर 15 दिनों के भीतर जलापूर्ति दुरुस्त करने की सख्त हिदायत दी थी. हालांकि पूरा एक महीना गुजर जाने के बाद भी धरातल पर कोई सुधार नहीं हुआ.
फोन तक नहीं उठाते पीएचईडी के कनीय अभियंता
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में विभाग की सुस्ती को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है :
- लापरवाही की इंतहा : एडीएम के स्पष्ट आदेश के बावजूद पीएचईडी के जेई समस्या का समाधान करना तो दूर, अब जनप्रतिनिधियों और आम लोगों के फोन तक नहीं उठाते हैं.
- मुख्यालय के चक्कर : शिविर में आवेदन देने के बाद भी लोगों को दोबारा प्रखंड कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है.
- व्यवस्था पर सवाल : पंचायत स्तर पर त्वरित समाधान न मिलने से सरकारी शिविरों की सार्थकता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं.
मुखिया संघ ने दी बहिष्कार की चेतावनी
समस्याओं का समय पर निष्पादन न होने से पंचायत प्रतिनिधि भी खुद को असहाय और उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. मुखिया संघ के प्रखंड अध्यक्ष प्रिय रंजन गोपाल, मुखिया प्रतिनिधि पिंटू गिरी, अरुण सक्सेना एवं नेमोलाल रजक ने रोष जताते हुए कहा कि जनता के आक्रोश का सामना उन्हें करना पड़ता है. अधिकारियों की उदासीनता के कारण जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच शर्मसार होना पड़ता है.
प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि शिविर आयोजन के लिए कोई अतिरिक्त सरकारी फंड भी नहीं मिलता और सारा भार पंचायतों पर होता है. ऐसे में यदि समस्याओं का समाधान ही नहीं होना है, तो आगे से सहयोग शिविरों का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा.
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