हसनपुर. प्रखंड के मध्य विद्यालय हसनपुर गांव को उच्च विद्यालय का दर्जा तो दे दिया गया लेकिन उच्च विद्यालयों में शिक्षकों के नहीं होने के कारण छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इस बाबत नौवीं में नामांकन कराने वाले छात्रों ने बताया कि उनका आठवीं पास होने के बाद नौवीं मंे दाखिला ले लिया गया लेकिन किसी भी विषय के शिक्षक नहीं होने के कारण नामांकित सभी छात्रों को निजी कोचिंग का सहारा लेना पड़ा है. ऐसे में वैसे बच्चों को जिनके अभिभावक मजदूरी करते हैं. अपने भविष्य को लेकर चिंता सताती है कि वे लोग आर्थिक तंगी के कारण प्राइवेट संस्थान नहीं पहुंच पाते हैं. उनका परीक्षा परिणाम क्या होगा. बता दें कि आजादी से पहले वर्ष 1934 ई. में ही इस मध्य विद्यालय की स्थापना हुई थी. बावजूद यह विद्यालय अभी भी कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वे लोग इस बात को लेकर काफी चिंतित हैं कि प्रखंड का सबसे पुराना मध्य विद्यालय होने के बाद भी इसे सरकार द्वारा क्यों उपेक्षित रखा गया है. जिसके कारण उनके गांव के बच्चों को उच्च शिक्षा लेने के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता था. ऐसे में जब उनके गांव के विद्यालय को उच्च विद्यालय का दर्जा दिया गया है तो उच्च विद्यालय के लिए शिक्षक ही नहीं भेजे गये हैं जबकि उच्च विद्यालय का भवन निर्माण कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है. वहीं विद्यालय के एचएम पंचानंद ठाकुर बताते हैं कि आठवीं तक ही छात्रों की संख्या काफी होने के बाद भी इस वर्ष नौवीं मंे 93 छात्रों ने नामांकन कराये हैं लेकिन पंचायत व प्रखंड शिक्षकों को मिलाकर इसकी कुल संख्या आठ ही है. जिससे उन लोगों को भी शैक्षणिक कार्य करने मे परेशानी का सामना करना पड़ता है.
सुविधा मिली नहीं, विद्यालय कर दिया गया उत्क्रमित
हसनपुर. प्रखंड के मध्य विद्यालय हसनपुर गांव को उच्च विद्यालय का दर्जा तो दे दिया गया लेकिन उच्च विद्यालयों में शिक्षकों के नहीं होने के कारण छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इस बाबत नौवीं में नामांकन कराने वाले छात्रों ने बताया कि उनका आठवीं पास होने के बाद नौवीं मंे दाखिला […]
