मृत्यु अंतिम सत्य है : लवकुश

हसनपुर. प्रखंड के शासन गांव में जारी 11 दिवसीय श्री श्री 1008 महारुद्र यज्ञ ज्यांे ज्यांे आगे बढ़ रहा है आस्थावानों का सैलाव उमड़ रहा है. भीषण गर्मी के बावजूद काफी संख्या में श्रद्घालु यज्ञ में भाग ले रहे हैं. वैदिक मंत्रोच्चार से इलाका गूंजायमान हो रहा है. महायज्ञ में पहंुच रहे श्रद्घालु सती दरबार […]

हसनपुर. प्रखंड के शासन गांव में जारी 11 दिवसीय श्री श्री 1008 महारुद्र यज्ञ ज्यांे ज्यांे आगे बढ़ रहा है आस्थावानों का सैलाव उमड़ रहा है. भीषण गर्मी के बावजूद काफी संख्या में श्रद्घालु यज्ञ में भाग ले रहे हैं. वैदिक मंत्रोच्चार से इलाका गूंजायमान हो रहा है. महायज्ञ में पहंुच रहे श्रद्घालु सती दरबार की एक झलक पाने को बेताब रहते हैं. दूसरी ओर अयोध्या से आये प्रवचनकर्ता लवकुशजी महाराज श्रीमद्भागवत कथा तो झांसी से आयी बहन किरण भारती के रामकथा से वातावरण भक्तिरस से सराबोर है. लवकुश महाराज ने भागवत कथा कहते हुए बताया कि भागवत कथा दो पायों पर आधारित है. एक परीक्षित दूसरा कंस. दोनों को मृत्यु का भय था. राजा परीक्षित मृत्यु के स्वागत में गंगा किनारे अनशन व्रत कर रहे थे. दूसरी ओर कंस अपने को मृत्यु से बचने के लिए तरह तरह के उपाय ढूंढ रहा था लेकिन मृत्यु तो अंतिम सत्य है. झांसी से आयी रामकथा वाचिका किरण भारती ने राम कथा कहते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोतम राम का चरित्र बड़ा ही सरल और अनुकरणीय है. भगवान राम और कृष्ण में अंतर यही है कि एक का आचरण गंभीर तो दूसरा का चपल है. आज के व्यवाहरिक जीवन में राम का चरित्र उनकी सीख धारण करने पर ही नश्वर संसार में जीया जा सकता है. मौके पर महंत शंभू दास, प्रमुख बुल्लू दास, उपप्रमुख विनोद कुमार यादव, पूर्व प्रमुख संजय दास, कन्हैया गुप्ता, हरेराम राय, अशोक राय, माखन झा, पप्पू भारत, रामाशीष यादव, मनीष कुमार, सर्वेश कुमार, दिलखुश पाठक, रामप्रवेश राय, रंधीर कुमार, घनश्याम आचार्य, उपेंद्र पांडेय, मुन्नाजी आदि थे.

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