अरहर फसल में फली छेदक कीट का खतरा

फोटो संख्या : 1बचाव से बढ़ेगी दलहनी फसल की उत्पादकतादलहन वैज्ञानिक ने दिये छिड़काव का सुझावप्रतिनिधि, पूसाअरहर फसल परवान पर है. पौधे फूल के अवस्था में आ गये हैं. कुछ में फल भी लगने शुरू हो गये हैं. ऐसी अवस्था में फसलों की निगरानी जरूरी है. क्योंकि यही वह समय है जब दलहनी फसलों पर […]

फोटो संख्या : 1बचाव से बढ़ेगी दलहनी फसल की उत्पादकतादलहन वैज्ञानिक ने दिये छिड़काव का सुझावप्रतिनिधि, पूसाअरहर फसल परवान पर है. पौधे फूल के अवस्था में आ गये हैं. कुछ में फल भी लगने शुरू हो गये हैं. ऐसी अवस्था में फसलों की निगरानी जरूरी है. क्योंकि यही वह समय है जब दलहनी फसलों पर फली छेदक कीट का हमला होता है. जारी मौसम कीट के लिए अनुकूल है. ऐसे में खास तौर से अरहर को लेकर किसान सावधान रहें. अन्यथा फसल की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है. यह कहना है राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय अंतर्गत तिरहुत कृषि महाविद्यालय के दलहनी विभाग के मुख्य वैज्ञानिक एवं समन्वयक डॉ देवेंद्र सिंह का. इनका कहना है कि दलहनी फसलों का शत प्रतिशत बचाव कर के ही अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. इसके लिए कीट नियंत्रण जरूरी है. फूल की अवस्था के बाद फल लगने के आरंभ में खेत में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए. यदि कम नमी के लक्षण प्रतीत हों तो फसल की सिंचाई की जा सकती है. वैसे तो दलहनी फसलों में फली मक्खी, प्लूम मोथ, नीली तितली जैसे कीट का प्रकोप होता है. लेकिन सर्वाधिक प्रभावित करने वाला कीट फली छेदक होता है. यह सीधे सीधे फसल के दाने को प्रभावित करता है. इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है. इस कीट पर नियंत्रण के लिए किसान फूल की अवस्था से ही दो से तीन बार इंडोसल्फान 35 ईसी या मोनोकोटोफॉस नामक दवा का छिड़काव कर सकते हैं. इससे दाने सुरक्षित रह सकेंगे जिससे उत्पादन में वृद्धि होगी.

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