मोहिउद्दीननगर. सर्द पछुआ हवा के झोंकों से हाड़ कंपकपाने वाली ठंड से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रखंड क्षेत्र में जिंदगी ठहर सी गयी. इसका सर्वाधिक असर दैनिक मजदूरी करने वालों, रिक्शा चालकों, ऑटों चालकों, बेवसों व बच्चों पर स्पष्ट दिख रहा है. अपने व परिजनों का पेट पालने के लिए इस भीषण ठंड में भी मजबूरन काम पर जाना पड़ता है. इनके बच्चों की समुचित देखभाल नहीं होने के कारण ठंड का असर इनके सेहत पर पड़ रहा है. मदुदाबाद व मािेहउद्दीननगर बाजार में मोटिया का काम करने वाले मजदूरों पर इस ठंड ने आफत ही ला दी है. जब सामानों को ट्रक पर लोड या अनलोड करने की बारी आती है और जल्दबाजी की बात की जाती है तो इनके दर्द-ए-बयां माननीय संवेदना को झंकृत कर देते है. ऑटो चालक संतोष कुमार सिंह का मर्मस्पर्शी बयान यह है कि स्टेशन परिसर मंे जब रेलयात्रियों का इंतजार करना पड़ता है और सर्द हवा की झौके वदन से टकराती है तो ऐसा प्रतीत होता कि शरीर में चुभन पैदा हो रही है. लेकिन पेट की खातिर ऐसा सहना ही पड़ता है. प्रशासनिक स्तर पर इन गरीबों के लिए कंबल वितरण की व्यवस्था भी नहीं गई है और अलाव की ऐसी स्थिति मानों ऊंट के मूंह में जीरा. इधर, पशुपालक अजय कुमार सिंह, प्रियरंजन, भोला झा व संतोष झा बताते हैं कि ठंड के कारण पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई है जिससे पशुपालकों की आर्थिक स्थिति भी खराब होने लगी.
प्रखंड क्षेत्र में कड़ाके ठंड से ठहरी जिंदगी
मोहिउद्दीननगर. सर्द पछुआ हवा के झोंकों से हाड़ कंपकपाने वाली ठंड से ऐसा प्रतीत होता है कि प्रखंड क्षेत्र में जिंदगी ठहर सी गयी. इसका सर्वाधिक असर दैनिक मजदूरी करने वालों, रिक्शा चालकों, ऑटों चालकों, बेवसों व बच्चों पर स्पष्ट दिख रहा है. अपने व परिजनों का पेट पालने के लिए इस भीषण ठंड में […]
