प्रभु यीशु के आगमन को ले कैरल गान शुरू

फोटो संख्या : 1 प्रभु का जन्मोत्सव मनाने में जुटे ईसाई धर्मावलंबीसमस्तीपुर. क्रिसमस का त्योहार करीब आ रहा है. कैरल सिंगिंग की ध्वनि तेज होने लगी है. इससे त्योहार का उत्साह दिन व दिन बढ़ रहा है. शहरी क्षेत्र में रहने वाले ईसाई धर्मावलंबियों की रौनक देखते ही बन रही है़ कैरल सिंगिंग प्रभु यीशु […]

फोटो संख्या : 1 प्रभु का जन्मोत्सव मनाने में जुटे ईसाई धर्मावलंबीसमस्तीपुर. क्रिसमस का त्योहार करीब आ रहा है. कैरल सिंगिंग की ध्वनि तेज होने लगी है. इससे त्योहार का उत्साह दिन व दिन बढ़ रहा है. शहरी क्षेत्र में रहने वाले ईसाई धर्मावलंबियों की रौनक देखते ही बन रही है़ कैरल सिंगिंग प्रभु यीशु के आगमन का संदेश है़ मसीही समाज में 1 दिसंबर से ही कैरल सिंगिंग शुरू हो जाती है़ चर्च के पुरोहितों की टोली विश्वासियों के घर घर जाकर कैरल गाते हंै जिन्हें उपहार मिल रहे हैं. धर्मावलंबी बताते हैं कि कैरल सिंगिंग प्रभु जन्मोत्सव तक चलेगा. पादरी ललित पाल ने बताया कि 1 दिसंबर से ही कैरल सिंगिंग शुरू हो चुकी है़ दो हजार वर्ष पहले जब प्रभु यीशु का जन्म गोशाला में हुआ तो उस समय स्वर्ग दूतों ने गीत गाया़ इसी को याद करते हुए आज भी ईसाई समाज के घर घर में जाकर कैरल गाकर यह बताते हैं कि मुक्तिदाता का जन्म हुआ है़ ऐसा माना जाता है कि क्रिसमस गीतों में सबसे पहला और सर्वाधिक पुराना गीत का जन्म चौथी सदी में हुआ़ इस गीत के बोल हैं जीजस रिफुलसीह ओमनियम़ इसका संगीत संत हिलेरी ऑफ पोयटियर्स ने तैयार किया था़ 12 वीं सदी के दौरान संत फ्रांसिस ऑफ असीसी ने क्रिसमस कैरल्स का औपचारिक परिचय इसे चर्च सर्विस में शामिल करके करवाया था़ हल्की फुल्की और गाने में आसान धुनें 14 वीं शताब्दी में चलन में आयी. अब तो यह अनुयायियों की जुबान पर छाया हुआ है.

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