तिलकुट, लाय, चूड़ा, मुढ़ी, गुड़ व सब्जियों की खूब हुई बिक्री, दो करोड़ का हुआ कारोबार

जिले में मकर संक्रांति पर्व इस बार परंपरागत रूप से बुधवार को मनाया जा रहा है, जिसको लेकर मंगलवार को बाजारों में खरीदारों की भीड़ लगी रही.

By Dipankar Shriwastaw | January 13, 2026 5:58 PM

सहरसा. जिले में मकर संक्रांति पर्व इस बार परंपरागत रूप से बुधवार को मनाया जा रहा है, जिसको लेकर मंगलवार को बाजारों में खरीदारों की भीड़ लगी रही. पर्व को लेकर बाजार की रौनक बढ़ गयी है. तिलकुट के साथ दूध एवं दही के कारोबार में अचानक तेजी आ गयी है. ठंड से राहत एवं बाजार में मजबूत ग्राहकी को देख कारोबारियों की उम्मीदें भी बढ़ी है. इस बार मकर संक्रांति में दो करोड़ से अधिक के कारोबार का अनुमान लगाया जा रहा है. हालांकि इस बार मकर संक्रांति के दिन एकादशी रहने से खिचड़ी अधिकांश घरों में नहीं बनेगी. इससे इस बार लगभग घरों में खिचड़ी की जगह चूड़ा-दही की ही खपत होगी.

कारोबारियों की मानें तो सिर्फ दूध की खपत पांच लाख लीटर से अधिक होने वाली है, जबकि इससे अधिक दही की बिक्री हो सकती है. दूसरी ओर तिलकुट का कारोबार भी उफान पर आ गया है. चूड़ा-गुड़ व मुढ़ी की बिक्री पहले से ही तेज है. शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पतंगबाजी करते हैं. हालांकि इसमें अब कमी देखी जा रही है. पर्व को लेकर पूरे दिन बाजार रौनक रहा. लोग जमकर खरीदारी करते रहे. नयी फसल के घर में आने की खुशी में लोग लोहड़ी पर्व मनाते हैं.

लाय की खूब हुई बिक्री

पहले जहां लोग घरों में विभिन्न तरह के लाय खुद ही तैयार करते थे. घर की महिलाएं पर्व से पूर्व ही इसकी तैयारी में जुट जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे इसमें कमी आती गयी. अब लोग बाजारों पर ही निर्भर रहने लगे. हालत यह है कि तैयार लाय का मार्केट भी काफी बढ़ गया है. सभी तरह के तैयार लाई सभी चौक-चौराहों पर मिलने से लोग इसकी जमकर खरीदारी कर रहे हैं. वहीं गुड़ की बिक्री भी पर्व को लेकर काफी है.

खूब बिक रही विभिन्न प्रकार की सब्जिय

ांपर्व को लेकर अन्य दिनों की अपेक्षा सब्जियों की खासी बिक्री हो रही है. लोगों की बढ़ती मांग को देखते हुए सब्जियों के भाव में तेजी रही. 10 रुपये किलो बिकने वाला गोभी व बैगन 50 से 60 रुपये किलो बिका. मटर के भाव 20 से बढ़कर 40 से 50 रहे. फलों के दामों में भी वृद्धि देखी गयी.

तिलकुट का बाजार रहा गर्म

पर्व को लेकर पिछले 15 दिनों से तिलकुट का बाजार सजा है. प्रत्येक चौक-चौराहे पर तिलकुट की जमकर बिक्री हो रही है. 200 रुपये से लेकर 800 रुपये किलो तक तिलकुट बिक रहे हैं. शंकर चौक से लेकर महावीर चौक तक तिलकुट के दुकान सजे हैं. जहां खुदरा से लेकर थोक तक की बिक्री हो रही है. बुधवार को पर्व होने से मंगलवार को तिलकुट की बिक्री परवान पर रही.

पतंगों के बाजार में भी रही तेजी

मकर संक्रांति में पतंगबाजी का खासा महत्व है. युवा एवं बच्चों में इसका खासा उत्साह रहता है. पूरे दिन युवा एवं उनके पीछे बच्चे पतंगबाजी में लगे रहते हैं. इस दौरान एक दूसरे पतंग की कटाई का खेल होता है. कटे पतंग के पीछे बच्चों की दौड़ का मजा अलग ही होता है. हालांकि अब इसमें कमी देखी जा रही है.

14 जनवरी को ही मनायी जायेगी मकर संक्रांति व षटतिला एकादशी

मकर संक्रांति की तारीख को लेकर इस बार कोई असमंजस नहीं है. शास्त्रों के अनुसार इस साल मकर संक्रांति का पर्व 14 को मनाया जायेगा. जाने माने ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा ने कहा कि मिथिला में विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी बुधवार को ही मकर संक्रांति एवं षटतिला एकादशी मनायी जायेगी. उन्होंने कहा कि किसी एक राशि से सूर्य के दूसरी राशि में गोचर करने को ही संक्रांति कहते हैं. जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे मकर संक्रांति कहते हैं. इस बार यह प्रवेश 14 तारीख को रात में 09.09 मिनट के बाद विश्वविद्यालय पंचांग में स्पष्ट है. उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति एवं षटतिला एकादशी 14 जनवरी को ही है एवं मिथिला में विश्वविद्यालय पंचांग के हिसाब से इसका पुण्य काल दिन में बारह बजे क़े बाद सूर्यास्त तक है, लेकिन प्रवेश रात्रि 09.09 मिनट के बाद है. मकर संक्रांति 14 को ही है. लेकिन स्नान, पूजा,अन्न दान या अन्य दान अपनी सुविधानुसार करें.

भगवती उग्रतारा को लगेगा छप्पन भोग, तैयारी में जुटे पुजारी

महिषी. मुख्यालय स्थित अति प्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ उग्रतारा मंदिर में मकर संक्रांति के दिन भगवती को छप्पन भोग लगाने को लेकर हलचल तेज है. मंदिर के पुजारी व ग्रामीण श्रद्धालु इस पारंपरिक विशिष्ट पूजा को लेकर तैयारी में जुट गये हैं. स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, बुद्ध व वशिष्ठ की आराध्य व शक्ति के तीनों मूल बीजों महाकाली, महालक्ष्मी व महासरस्वती के समन्वित स्वरूप में प्रतिस्थापित उग्रतारा मंदिर में छप्पन भोग लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है. ऐसी मान्यता है कि गुरु वशिष्ठ व भगवान बुद्ध भी इस पूजन विधि के द्वारा अपनी साधना करते थे व आज भी मंदिर में इस तिथि को छप्पन भोग लगाने की परंपरा है. इस पूजा में गांव के सभी वर्गों के लोग अपनी सहभागिता देते हैं व भोग प्रसाद ग्रहण कर पारिवारिक सुख शांति का आशीर्वाद लेते हैं. नव धान्य से निर्मित खिचड़ी व व्यंजन के संग सम सामयिक फल व मिष्ठान के संग भोग लगाया जायेगा.

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