कोसी कटाव में विलीन विद्यालय तीन वर्ष बाद मूल स्थान पर लौटा

वर्ष 2023 एवं 24 में प्रखंड क्षेत्र के हाटी पंचायत स्थित राजकीय बुनियादी विद्यालय हाटी का भवन कोसी नदी के भीषण कटाव में कटकर नदी में विलीन हो गया था.

शिक्षा के प्रति जनप्रतिनिधियों की मिसाल, हाटी विद्यालय का फिर से संचालन

चार लाख की लागत से बना भवन, हाटी विद्यालय में लौटी रौनक

नवहट्टा. वर्ष 2023 एवं 24 में प्रखंड क्षेत्र के हाटी पंचायत स्थित राजकीय बुनियादी विद्यालय हाटी का भवन कोसी नदी के भीषण कटाव में कटकर नदी में विलीन हो गया था. विद्यालय भवन नष्ट होने के बाद बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई. इसके बाद मजबूरी में उक्त विद्यालय को कोसी पूर्वी तटबंध के पूर्वी भाग स्थित हाटी विद्यालय में शिफ्ट कर दिया गया, जहां पढ़ने वाले बच्चों को प्रतिदिन नदी पार कर घंटों पैदल चलकर विद्यालय पहुंचना पड़ता था. इससे छोटे बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था. बच्चों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए हाटी पंचायत के मुखिया फुलेश्वर सादा एवं मुखिया प्रतिनिधि दीवाना सिंह ने शिक्षा के प्रति सराहनीय पहल की. पंचायत मद की राशि से लगभग चार लाख रुपये खर्च कर तथा निजी सहयोग से दो कमरे का पक्का भवन एवं बरामदा का निर्माण कराया गया. साथ ही विद्यालय परिसर में चापाकल भी लगवाया गया, जिससे पेयजल की सुविधा सुनिश्चित हो सकी. नवनिर्मित भवन में विद्यालय का पठन-पाठन पंचायत के मुखिया फुलेश्वर सादा एवं मुखिया प्रतिनिधि दीवाना सिंह की उपस्थिति में विधिवत रूप से प्रारंभ किया गया. विद्यालय के फिर से अपने मूल स्थान पर संचालन शुरू होने से बच्चों, अभिभावकों एवं शिक्षकों में खुशी का माहौल देखा गया.

इस मौके पर एनपीएस एराजी कठुआर के शिक्षक अमित कुमार, नंद किशोर भारती, दीपक सिंह तथा राजकीय बुनियादी विद्यालय के शिक्षक सुशील सिंह, दीपशिखा कुमारी, मिस्टी एवं सोनी कुमारी ने विद्यालय के फिर से संचालन पर हर्ष व्यक्त किया. दोनों विद्यालयों के प्राचार्यों ने मुखिया फुलेश्वर सादा एवं मुखिया प्रतिनिधि दीवाना सिंह के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनके प्रयास से विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था सुदृढ़ हुई है और बच्चों को अपने ही गांव में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला है. वहीं स्थानीय लोगों ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मुखिया ने प्रखंड विकास पदाधिकारी से लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी तक लगातार चक्कर काटकर विद्यालय को उसके मूल स्थान पर शिफ्ट कराया और पठन-पाठन फिर से शुरू करवाया.

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By Dipankar Shriwastaw

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