यूजीसी रेगुलेशन एक्ट बेहतर तरीके से हो लागू, छात्र-युवाओं ने निकाला प्रतिवाद मार्च

यूजीसी रेगुलेशन एक्ट बेहतर तरीके से हो लागू, छात्र-युवाओं ने निकाला प्रतिवाद मार्च

सहरसा . यूजीसी द्वारा जारी प्रमोशन ऑफ इक्वलिटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन के समर्थन में संयुक्त छात्र-युवा संघर्ष समिति के आह्वान पर शुक्रवार को जिला परिषद प्रांगण से समाहरणालय सहरसा तक विशाल प्रतिवाद मार्च निकाला गया. साथ ही जिलाधिकारी को राष्ट्रपति के नाम स्मार पत्र सौंपा गया. जिसमें छात्र-युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, आंदोलनकारी व विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. प्रतिवाद मार्च जिला परिषद प्रगांण से थाना चौक, वीर कुंवर सिंह, रविदास चौक होते समाहरणालय पहुंचकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते जमकर नारेबाजी किया. साथ ही यूजीसी नियमों को कॉलेज-विश्वविद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करने की जोरदार मांग उठायी. मौके पर संयुक्त छात्र-युवा संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि 13 जनवरी को यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए यूजीसी रेगुलेशन एक्ट को अनुसुचित किया. जो उच्च शिक्षा में जाति, धर्म, लिंग, भाषा, क्षेत्र पर आधारित भेदभाव को रोकने के लिए एक प्रभावी कानून था. इसको सुप्रीम कोर्ट द्वारा दुरुपयोग की आशंका मानकर 29 जनवरी को रोक लगा दिया. इस रोक के खिलाफ व यूजीसी एक्ट को लागू कराने की मांग को लेकर एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग के छात्र-छात्रा पूरे देश में आंदोलित हैं. नेताओं ने कहा कि आज भी देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में दलित, आदिवासी, पिछड़े, अल्पसंख्यक एवं महिला विद्यार्थियों के साथ भेदभाव व उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आती रहती है. रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी जैसे छात्रों की मौत इस बात का प्रमाण है कि जातीय एवं सामाजिक भेदभाव एक गंभीर समस्या बनी हुई है. यूजीसी के जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच जातीय भेदभाव से संबंधित शिकायतों में लगभग 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. ऐसे में समानता से जुड़े यूजीसी के नियम भले ही पूर्ण रूप से पर्याप्त न हो लेकिन वे भेदभाव रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थे. संयुक्त छात्र-युवा संघर्ष समिति के नेताओं ने केंद्र सरकार से मांग की कि तत्काल प्रभाव से एक सशक्त एवं प्रभावी रोहित एक्ट लागू किया जाय. यूजीसी गाइडलाइंस को और अधिक सख्त एवं प्रभावी बनाया जाय. प्रतिवाद मार्च में जिला परिषद उपाध्यक्ष धीरेन्द्र यादव, एनएसयूआई के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक मनीष कुमार, एआईवाइएफ के शंकर कुमार, आरवाइए के राष्ट्रीय पार्षद कुंदन यादव, छात्र राजद के धीरज सम्राट, भारतीय विद्यार्थी मोर्चा के सनोज राम, अभाविप के कृष्णाकांत गुप्ता, छात्र लोजपा रामविलास के संदीप पासवान, संजय पासवान डीवाईएफआई के कुलानंद कुमार, विवेक कुमार रिंकू, आइआइपी के विद्या शर्मा ने किया. मशाल जुलूस में मो. ताहिर, धनोज तांती, शंभू यादव, विक्की राम, भीम कुमार भारती, सुशील यादव, प्रेम शंकर उर्फ प्रमोद यादव, सरोज यादव, मनोज पासवान, नसीमुद्दीन, वकील कुमार यादव, आईआईपी के पूर्व प्रवक्ता डॉ धनोज कुमार, अमित कुमार, आशीष कुमार, आइसा जिलाध्यक्ष आशीष आनंद, सागर कुमार शर्मा, सुरेंद्र यादव, सोनू यादव, रंजय शर्मा, रमेश यादव, भवेश यादव, मंशु यादव, विवेक कुमार रिंकू, ताबिश मेहर, मो मोबिन, पुनपुन यादव, दिलखुश राम, संदीप पासवान, सुशील कुमार सहित हजारों प्रतिवाद मार्च में शामिल हुए.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >