Saharsa News: जब पेड़ों की कटाई, बढ़ते प्रदूषण और जल संकट की चर्चा हर जगह हो रही है, तब सहरसा की बेटी स्वाती सिंह ने कोसी क्षेत्र को फिर से हराभरा बनाने का संकल्प लिया है. दिल्ली में रहने के बावजूद उनका मन अपनी जन्मभूमि से जुड़ा है और यही जुड़ाव उन्हें बार-बार कोसी की धरती पर लौटने के लिए प्रेरित करता है.
श्री नारायण फाउंडेशन की ट्रस्टी स्वाती सिंह सहरसा और आसपास के इलाकों में हजारों पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण की मुहिम चला रही हैं. उनका उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि लोगों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाना भी है.
कोसी क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने की पहल
कभी हरियाली और प्राकृतिक समृद्धि के लिए पहचाना जाने वाला कोसी क्षेत्र आज बदलते पर्यावरण, जल संकट और प्रदूषण जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे समय में स्वाती सिंह का अभियान स्थानीय स्तर पर एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है.
वे लगातार विभिन्न स्थानों पर पौधरोपण कर रही हैं और लोगों को भी इस अभियान से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं. उनका मानना है कि यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है.
मां-बेटी की साझी मुहिम
इस अभियान में स्वाती सिंह को उनकी मां और श्री नारायण फाउंडेशन की मैनेजिंग ट्रस्टी कामेश्वरी कुमारी का निरंतर सहयोग मिल रहा है. कामेश्वरी कुमारी स्वयं लगभग पांच हजार पौधे लगाकर कोसी क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दे चुकी हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि मां-बेटी की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है, क्योंकि वे केवल संदेश नहीं दे रहीं, बल्कि स्वयं मैदान में उतरकर काम कर रही हैं.
दिल्ली में रहती हैं, लेकिन दिल कोसी के साथ
स्वाती सिंह का कहना है कि वे भले ही दिल्ली में रहती हों, लेकिन सहरसा और कोसी क्षेत्र से उनका भावनात्मक रिश्ता बेहद गहरा है. अपने क्षेत्र के भविष्य और पर्यावरण को लेकर उनकी चिंता ही उन्हें यहां बार-बार आने के लिए प्रेरित करती है.
उनका लक्ष्य कोसी क्षेत्र को अधिक से अधिक हरियाली से आच्छादित करना और ऐसा समाज तैयार करना है जो प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़े.
पर्यावरण असंतुलन के दिख रहे संकेत
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार लगातार पेड़ों की कटाई और कृषि में रासायनिक कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग का असर केवल मानव जीवन पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों पर भी पड़ रहा है. कभी घर-आंगन में आसानी से दिखने वाली गौरैया और पेड़ों पर चहचहाने वाले पक्षियों की संख्या लगातार घट रही है.
विशेषज्ञ इसे प्रकृति के असंतुलन और भविष्य के लिए चेतावनी का संकेत मानते हैं. ऐसे में स्थानीय स्तर पर पौधरोपण और हरियाली बढ़ाने जैसे प्रयास और अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं.
Saharsa News: लोगों से की एक पौधा लगाने की अपील
स्वाती सिंह ने लोगों से अपील की है कि वे अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों, जैसे जन्मदिन, विवाह, वर्षगांठ या किसी विशेष उपलब्धि पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल का संकल्प लें.
उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक संस्था या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है. यदि सामूहिक प्रयास किया जाए, तो कोसी क्षेत्र को फिर से हराभरा बनाया जा सकता है.
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