सहरसा, सत्तरकटैया. नारायणपुर नंदलाली में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत पुराण कथा के तीसरे दिन वृंदावन से पहुंचीं कथा व्यास देवी पूर्णिमा गार्गी ने मानव जीवन में महत्वाकांक्षा और संगत के प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि मानव की महत्वाकांक्षा ही उसके सुख और दुख का कारण बनती है. यदि महत्वाकांक्षा स्वार्थरहित हो तो वह शुभ और मंगलकारी परिणाम देती है, लेकिन उसमें स्वार्थ शामिल हो जाये तो वही मनुष्य को पतन की ओर ले जाती है.
संगत का जीव के जीवन पर पड़ता है गहरा प्रभाव
देवी पूर्णिमा गार्गी ने कहा कि जीव के जीवन पर उसकी संगत का बड़ा प्रभाव पड़ता है. कलियुग के प्रभाव से राजा परीक्षित भी नहीं बच सके थे. उन्होंने अपने राज्य में कलियुग को स्थान दिया और यही उनके मृत्यु का कारण बना. उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य के लिए धर्म की रक्षा सर्वोपरि है. धर्म की रक्षा के मार्ग में यदि कोई अपना भी बाधा बनता है तो उसका त्याग करना चाहिए.
महाभारत में श्रीकृष्ण ने धर्म का साथ दिया
कथा व्यास ने महाभारत प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध के दौरान पांडवों ने साथ देने के लिए भगवान श्रीकृष्ण को चुना, जबकि कौरव पक्ष ने उनकी सेना का सहयोग लिया. इसके बावजूद विजय पांडवों की हुई, क्योंकि उनके साथ स्वयं भगवान श्रीकृष्ण थे.
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने धर्म का साथ दिया और अधर्म का नाश किया. महाभारत का प्रसंग मनुष्य को धर्म, सत्य और उचित संगत के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है.
भजनों पर झूमे श्रद्धालु
कथा के दौरान संगीत कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी. भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु भावविभोर नजर आये और कई श्रद्धालु झूमते हुए दिखाई दिये. कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी.
आयोजन की सफलता में ग्रामीण जुटे
श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन को सफल बनाने में ग्रामीण सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं. शिवकुमार यादव, लाल यादव, सचिन यादव, राम प्रकाश यादव, हीरालाल यादव, बीरबल यादव, सुरेश यादव, श्याम मिस्त्री सहित कई ग्रामीण आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं.
