वायरल वीडियो के बाद सदर अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल, पोस्टमार्टम हाउस की लापरवाही उजागर

Saharsa news: जानकारी के अनुसार संदिग्ध मौत के मामलों में पोस्टमार्टम के दौरान शरीर से निकाले गए अंगों के नमूनों यानी विसरा को सुरक्षित रखा जाता है, जो फॉरेंसिक जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है. लेकिन मॉडल सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में विसरा खुले में पड़ा मिला और कुत्ते उसे नोचते नजर आए.

विसरा कांड ने उजागर की स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियां, फॉरेंसिक व्यवस्था पर सवाल कायम

सहरसा से अंजन आर्यन की रिपोर्ट:

Saharsa news: सहरसा के मॉडल सदर अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस में कुत्तों द्वारा मानव विसरा नोचे जाने की घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. घटना का वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया है, लेकिन अब कार्रवाई को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है.

जानकारी के अनुसार संदिग्ध मौत के मामलों में पोस्टमार्टम के दौरान शरीर से निकाले गए अंगों के नमूनों यानी विसरा को सुरक्षित रखा जाता है, जो फॉरेंसिक जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है. लेकिन मॉडल सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में विसरा खुले में पड़ा मिला और कुत्ते उसे नोचते नजर आए.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पोस्टमार्टम हाउस की बदहाल व्यवस्था, सुरक्षा की कमी और मॉर्चरी के अभाव जैसे गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज कर एक निचले स्तर के कर्मी पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. बताया जा रहा है कि संबंधित कर्मी को रोगी कल्याण समिति के माध्यम से पोस्टमार्टम हाउस की देखभाल के लिए रखा गया था.

वर्षों से बदहाल है पोस्टमार्टम हाउस

जानकारों के मुताबिक पोस्टमार्टम हाउस की सुरक्षा, सफाई और संसाधनों की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की होती है. बावजूद इसके वर्षों से यहां की स्थिति बदहाल बनी हुई है. भवन जर्जर है, दीवारों में दरारें हैं और पर्याप्त रोशनी तक उपलब्ध नहीं है. कई बार डॉक्टरों को एक बल्ब के सहारे पोस्टमार्टम करना पड़ता है.

आधुनिक उपकरणों का भी अभाव

पोस्टमार्टम हाउस में आधुनिक उपकरणों की भी कमी है. ब्रेन कटर मशीन नहीं होने के कारण अब भी हथौड़ी और छेनी का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं सुरक्षित विसरा संरक्षण, बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन और फ्री फ्लो पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं. अस्पताल में मॉर्चरी नहीं होने से शव और संवेदनशील नमूनों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं.

क्या बोले सिविल सर्जन

मामले पर सिविल सर्जन ने कहा कि हाल के समय में सुरक्षित किए गए विसरा को तुरंत संबंधित थाना को सौंप दिया जाता है. उन्होंने दावा किया कि वीडियो में दिख रहा विसरा कई वर्ष पुराना था. मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम हाउस की देखरेख से जुड़े कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं.

सिविल सर्जन ने बताया कि विसरा को जांच के लिए ले जाने की जिम्मेदारी पुलिस की होती है. वहीं उन्होंने कहा कि वीडियो में कुत्ते विसरा नहीं, बल्कि वहां रखे डिब्बे को फाड़ रहे थे. हालांकि घटना के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या केवल एक कर्मी पर कार्रवाई से पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी तय हो पाएगी.

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Published by: Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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