Saharsa news : फाॅग डिवाइस सिस्टम से लैस ट्रेनों की रफ्तार होगी 75 किमी प्रति घंटा

Saharsa news : बगैर फाॅग सेफ्टी डिवाइस वाले इंजन की गति सीमा 60 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गयी है.

Saharsa news : जैसे-जैसे विजिबिलिटी कम होती जा रही है, वैसे-वैसे ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन चुनौतियों से भरा हाेता जाता है. सर्दी के मौसम और कोहरे के दौरान सुरक्षित और कुशल ट्रेन परिचालन सुनिश्चित करने की दिशा में समस्तीपुर मंडल सक्रिय कदम उठा रहा है.

रेल तापमान की बारीकी से निगरानी और रिकार्डिंग

सर्दियों के महीने में आनेवाली चुनौतियों का सामना करने के लिए इस मंडल ने कई उपाय लागू किये हैं. इनमें रेल पथों की दृश्यता और संरक्षण ओएचई (ओवरहेड उपकरण), टीआरएस (ट्रैक्शन रोलिंग स्टॉक) आदि जैसे महत्वपूर्ण उपकरण शामिल हैं. कम तापमान के दौरान रेल और वेल्ड विफलताओं को रोकने के लिए मंडल द्वारा आवश्यकता अनुसार लॉन्गवेल्डेड रेल्स, कंटीन्यूअसवेल्डेडरेल्स पर डी स्ट्रेसिंग करने के साथ-साथ रेल ज्वाइंट की पूरी जांच और लुब्रिकेशन की जा रही है. आवश्यक आपूर्ति के लिए आरएफ, डब्लूएफप्रोन स्थलों की पहचान की गयी है. रेल स्थितियों की सटीक निगरानी सुनिश्चित करने के दिशा निर्देशों के अनुसार, शीतकालीन मौसम की गश्त को जीपीएस सक्षम निगरानी के साथ सुदृढ़ किया गया है. इसको लेकर सहरसा में भी सक्रियता देखी जा रही है. इसके अलावा सर्दियों के मौसम के दौरान और अद्वितीय चुनौतियों का सामना करने के लिए रेल तापमान की बारीकी से निगरानी और रिकार्डिंग की जा रही है.

विजिबिलिटी कम होने पर ट्रेनों की गति सीमा तय

रेल अधिकारियों ने विजिबिलिटी कम होने पर सभी लोको पायलट को ट्रेनों की गति सीमा तय कर दी है. इसके अनुसार जिन ट्रेनों में लोको पायलट के पास फाॅग सेफ्टी डिवाइस सिस्टम होगा, उसकी 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार निश्चित की गयी है. बगैर फाॅग सेफ्टी डिवाइस वाले इंजन की गति सीमा 60 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गयी है. इसके अलावा विजिबिलिटी कम होने पर लोको पायलट खुद ही गति सीमा तय करेंगे.

समस्तीपुर मंडल ने फॉग पायलट असिस्टेंट सिस्टम किया लागू

कोहरे की समस्या से निबटने के लिए मंडल ने वास्तविक समय पर नेविगेशन के साथ-साथ ट्रेन चालकों की सहायता के लिए उन्नत फॉग पास (फॉग पायलट असिस्टेंट सिस्टम) उपकरण लगाया है. इससे दृश्यता कम होने के बावजूद सुरक्षित और समय पर ट्रेन परिचालन को सक्षम बनाया जा सके. इसके अलावा उन्नत तकनीक का उपयोग करके त्रुटियों का जल्द पता लगाने और जोखिमों को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए ट्रेन की छतों, अंडर गियर घटकों, इंजनों और रोलिंग स्टॉक्स का संरक्षा निरीक्षण सख्ती से किया जा रहा है.

सिग्नलिंग सिस्टम को किया गया अपग्रेड

ट्रैक निगरानी और अनुरक्षण को प्राथमिकता देते हुए संभावित खतरों की पहचान के लिए अल्ट्रासोनिक फ्लॉडिटेक्शन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है.सिग्नलिंग सिस्टम को अपग्रेड किया गया है. अप्रत्याशित परिस्थितियों के दौरान तत्परता बढ़ाने के लिए फ्रंटलाइन कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण और नियमित मॉक ड्रिल के साथ आपातकालीन तैयारी को भी सुदृढ़ किया गया है.

हमारी प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा

मंडल रेल प्रबंधक समस्तीपुर विनय श्रीवास्तव ने बताया कि सर्दियों के मौसम में घने कोहरे को देखते हुए समस्तीपुर मंडल ने रेल पथ संरक्षा के कई स्टेप्स लिए हैं. हमारी प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा है और यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि वे सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा करें.

सुरक्षा के लिए उठाए गये कदम

फॉग पास सिग्नलिंग सिस्टम – फॉग पास सिग्नलिंग सिस्टम को सक्रिय किया गया है, जो कोहरे की स्थिति में ट्रेनों की गति को नियंत्रित करने में मदद करता है.

अतिरिक्त रेलवे कर्मचारी – कोहरे की स्थिति में अतिरिक्त रेलवे कर्मचारियों को तैनात किया जा रहा है, जो ट्रेनों की गति और सुरक्षा की निगरानी करेंगे.

24 घंटे रेल पथ निरीक्षण – 24 घंटे रेल पथ का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रेल पथ सुरक्षित और उपयुक्त है.

यात्री जागरूकता अभियान – यात्री जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. इसमें यात्रियों को कोहरे की स्थिति में सावधानी बरतने और ट्रेनों की गति को धीमा करने के बारे में जानकारी दी जा रही है.

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