सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट.
Saharsa News: संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ज्ञान भारतम मिशन परियोजना के तहत चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान में सहरसा जिले को बड़ी सफलता मिली है. जिला मुख्यालय से सटे कहरा गांव में एक परिवार के निजी पुस्तकालय से लगभग 400 से 500 वर्ष पुरानी बहुमूल्य और दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह प्राप्त हुआ है. इस खोज को मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
कहरा गांव के पुस्तकालय में मिला ज्ञान का खजाना
जिलाधिकारी दीपेश कुमार के मार्गदर्शन में जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा कुमारी झा के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने कहरा गांव में विशेष सर्वेक्षण किया. इस दौरान 75 वर्षीय सेवानिवृत्त कृषि निदेशक अभय कांत ठाकुर के आवास पर संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों का संग्रह सामने आया.
अभय कांत ठाकुर ने बताया कि उनके परिवार में कई पीढ़ियों से विद्या, संगीत और संस्कृत अध्ययन की समृद्ध परंपरा रही है. उनके नाना बलराम झा और पिता भागवत झा ने वर्षों पहले इन दुर्लभ ग्रंथों और पांडुलिपियों को संरक्षित किया था. आज भी उनके निजी पुस्तकालय में हजारों पुस्तकें और ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित हैं.
ज्योतिष, वास्तु और शास्त्रीय ज्ञान का भंडार
उग्रतारा भारती मंडन संस्कृत महाविद्यालय, महिषी के वेद संकायाध्यक्ष एवं प्राचीन लिपि विशेषज्ञ डॉ. आनंद दत्त झा ने पांडुलिपियों का अध्ययन करने के बाद बताया कि इनमें ज्योतिष, वास्तु विज्ञान, वर्षकृत्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की सामग्री मौजूद है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इन पांडुलिपियों का गहन अध्ययन भारतीय परंपरागत ज्ञान, मिथिला की विद्वत संस्कृति और प्राचीन शिक्षा व्यवस्था के कई अनछुए पहलुओं को सामने ला सकता है.
शोधकर्ताओं के लिए खुलेंगे नए द्वार
दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज के संस्कृत विभाग से जुड़े एक विद्वान ने भी इन पांडुलिपियों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. उनका कहना है कि सहरसा और आसपास के क्षेत्रों में संरक्षित पांडुलिपियों पर व्यापक शोध की आवश्यकता है. इससे मिथिला की समृद्ध बौद्धिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है.
15 जून तक जारी रहेगा सर्वेक्षण अभियान
जिला प्रशासन के अनुसार जिले में पांडुलिपि सर्वेक्षण का कार्य 15 जून तक जारी रहेगा. जिलाधिकारी दीपेश कुमार और जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा कुमारी झा ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास किसी भी प्रकार की प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ऐतिहासिक दस्तावेज हों तो इसकी जानकारी सर्वेक्षण दल को दें, ताकि उनका वैज्ञानिक संरक्षण और दस्तावेजीकरण किया जा सके.
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