सहरसा के पतरघट से राजेश कुमार सिंह की रिपोर्ट.
Saharsa News: मक्का उत्पादन के लिए प्रसिद्ध पतरघट प्रखंड में इन दिनों सड़कें यातायात मार्ग कम और खलिहान ज्यादा नजर आ रही हैं. किसानों द्वारा तैयार मक्का के दानों को सड़क पर फैलाकर सुखाने से अतलखा-पतरघट मुख्य सड़क समेत कई ग्रामीण मार्गों पर आवागमन प्रभावित हो गया है. स्थानीय लोग सड़क पर फैले मक्का के कारण दुर्घटनाओं और जाम जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.
सड़क पर मक्का, वाहनों के लिए बची संकरी जगह
पतरघट क्षेत्र के रहीम टोला, बिंद टोली, जम्हरा, दक्षिणवाड़ी, भरना टोला सहित कई गांवों की सड़कों पर बड़ी मात्रा में मक्का फैलाकर सुखाया जा रहा है. कई जगहों पर सड़क का अधिकांश हिस्सा मक्का से ढका हुआ है. इससे वाहन चालकों को बेहद सावधानी के साथ गुजरना पड़ रहा है.
स्थानीय लोगों के अनुसार कई मार्गों पर स्थिति वन-वे ट्रैफिक जैसी हो गई है. आमने-सामने से वाहन आने पर लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
फिसलकर घायल हो रहे राहगीर
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर फैले मक्का के दानों के कारण बाइक चालक और पैदल राहगीर कई बार संतुलन खो देते हैं. हाल के दिनों में कई लोग फिसलकर घायल भी हुए हैं और उन्हें निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ा है.
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है.
विरोध करने पर बढ़ जाता है विवाद
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब कोई राहगीर या वाहन चालक सड़क पर मक्का फैलाने का विरोध करता है तो कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है. कुछ मामलों में किसानों और उनके परिजनों द्वारा तीखी नोकझोंक और अभद्र व्यवहार की शिकायत भी सामने आई है.
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के वाहन प्रतिदिन इन मार्गों से गुजरते हैं. इसके बावजूद अब तक सड़क अतिक्रमण हटाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है.
लोगों ने पतरघट पुलिस और जिला प्रशासन से सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराने, यातायात व्यवस्था बहाल करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
खेती और यातायात के बीच संतुलन की चुनौती
मक्का किसानों के लिए फसल को सुरक्षित सुखाना जरूरी है, लेकिन सार्वजनिक सड़कों का उपयोग करने से आम लोगों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है. ऐसे में प्रशासन के सामने खेती की जरूरतों और जनसुविधा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है.
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