सहरसा में गणेश कुमार भगत ने फिर दिखाई मिसाल, प्लेटलेट्स दान कर बचाई जिंदगी की उम्मीद

Saharsa News : सहरसा के समाजसेवी गणेश कुमार भगत ने अपने जीवन का 58वां स्वैच्छिक प्लेटलेट्स दान कर मानवता की सेवा का एक और प्रेरणादायी उदाहरण पेश किया है. उनका यह कदम रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए लोगों को प्रेरित कर रहा है.

Saharsa News : सहरसा. रक्तदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि यह किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने का माध्यम बनता है. इसी सोच को साकार करते हुए श्री शंकर बाबू स्मृति सेवा फाउंडेशन के चेयरमैन गणेश कुमार भगत ने अपने जीवन का 58वां स्वैच्छिक रक्तदान प्लेटलेट्स डोनेशन के रूप में किया. आधुनिक एफेरेसिस मशीन के माध्यम से किए गए इस प्लेटलेट्स दान ने एक बार फिर समाज के सामने सेवा और समर्पण की मिसाल पेश की है.

58वीं बार किया स्वैच्छिक प्लेटलेट्स दान

गणेश कुमार भगत लंबे समय से रक्तदान और सामाजिक सेवा से जुड़े हुए हैं. उन्होंने प्लेटलेट्स दान के दौरान कहा कि मानवता की सेवा के लिए किया गया छोटा-सा प्रयास भी किसी व्यक्ति के जीवन को बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. उनका मानना है कि रक्त और प्लेटलेट्स की जरूरत कभी भी किसी मरीज को पड़ सकती है, इसलिए स्वस्थ लोगों को नियमित रूप से रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए.

आधुनिक एफेरेसिस मशीन से हुआ प्लेटलेट्स डोनेशन

आधुनिक एफेरेसिस मशीन की मदद से किया गया यह प्लेटलेट्स डोनेशन चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है. इससे मरीजों को जरूरत के अनुसार प्लेटलेट्स उपलब्ध कराए जा सकते हैं. खासकर डेंगू, कैंसर और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए प्लेटलेट्स दान जीवनरक्षक साबित होता है.

रक्तदान के प्रति जागरूक का दिया संदेश

श्री शंकर बाबू स्मृति सेवा फाउंडेशन की ओर से इस अवसर पर लोगों से रक्तदान के प्रति जागरूक होने की अपील की गई. संस्था ने कहा कि एक यूनिट रक्त या प्लेटलेट्स किसी मरीज के लिए नई जिंदगी का कारण बन सकता है. रक्तदान न केवल मरीजों की मदद करता है बल्कि समाज में सहयोग, संवेदनशीलता और मानवता की भावना को भी मजबूत बनाता है.

एक कदम बन सकता है किसी की जिंदगी की उम्मीद

फाउंडेशन ने लोगों से नियमित रक्तदान अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि आपका एक छोटा-सा प्रयास किसी परिवार की खुशियां वापस ला सकता है. रक्तदान महादान है और हर स्वस्थ व्यक्ति को इस सामाजिक जिम्मेदारी में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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