सहरसा के बनमा ईटहरी से आशीष कुमार सिंह की रिपोर्ट.
Saharsa News: बनमा ईटहरी प्रखंड के सहुरिया पंचायत स्थित भोरहा बथान के समीप पिछले छह माह से खराब पड़े कृषि ट्रांसफार्मर को सोमवार देर शाम बदल दिया गया. लंबे समय से बिजली संकट झेल रहे किसानों के लिए यह बड़ी राहत लेकर आया है. स्थानीय किसानों की समस्या को लेकर प्रभात खबर में खबर प्रकाशित होने के बाद बिजली विभाग सक्रिय हुआ और कनिय अभियंता नंदकिशोर कुमार की पहल पर नया ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई.
खबर छपते ही हरकत में आया बिजली विभाग
कृषि ट्रांसफार्मर खराब होने से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. धान रोपनी का मौसम शुरू होने के बावजूद खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा था. समस्या को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर दिया.
बिजली आपूर्ति शुरू होते ही किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई. ग्रामीणों ने इसे समय पर उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया.
30 एकड़ से अधिक खेती को मिला फायदा
ट्रांसफार्मर खराब रहने के कारण करीब 30 एकड़ से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई प्रभावित हो रही थी. किसानों का कहना है कि मूंग की फसल को नुकसान हो रहा था और धान की खेती पर भी संकट के बादल मंडरा रहे थे.
अब बिजली बहाल होने से किसानों को समय पर पटवन करने में सुविधा मिलेगी और खेती का काम प्रभावित नहीं होगा. किसान राजकुमार शर्मा, सुशील पासवान, ब्यास नंदन सिंह, रामबालक सिंह, सुभाष शर्मा और अन्य किसानों ने विभाग का आभार व्यक्त किया.
दूसरी समस्या अब भी बरकरार
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र का एक अन्य कृषि ट्रांसफार्मर पिछले दो वर्षों से खराब पड़ा है. वहीं दूसरे ट्रांसफार्मर का तेल भी अज्ञात चोर निकाल ले गए थे. इसके कारण किसानों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है.
किसानों ने मांग की है कि शेष समस्याओं का भी जल्द समाधान किया जाए ताकि कृषि कार्य बाधित न हो.
जल्द ठीक होगा दूसरा ट्रांसफार्मर
कनिय अभियंता नंदकिशोर कुमार ने बताया कि कृषि ट्रांसफार्मर खराब होने की जानकारी उन्हें अखबार के माध्यम से मिली थी. सूचना मिलते ही विभागीय स्तर पर कार्रवाई कर नया ट्रांसफार्मर लगाया गया और बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है.
उन्होंने आश्वासन दिया कि क्षेत्र के दूसरे खराब ट्रांसफार्मर की भी जल्द मरम्मत कर उसे चालू कराया जाएगा, ताकि किसानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सके और सिंचाई कार्य प्रभावित न हो.
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