Sawan Somwari 2026 : श्रावण मास की दूसरी सोमवारी को लेकर सहरसा जिले का माहौल पूरी तरह शिवमय हो गया है. रविवार को बाबा मटेश्वरधाम में जलार्पण के लिए डाकबमों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि सहरसा-मानसी रेलखंड के कई रेलवे स्टेशनों पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची. गेरुआ वस्त्र पहने हजारों श्रद्धालु बोलबम और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ छर्रापट्टी घाट की ओर रवाना होते रहे.
सिमरी बख्तियारपुर, सोनवर्षा कचहरी, कोपरिया और धमारा घाट स्टेशन दिनभर कांवरियों से भरे रहे, लेकिन सबसे अधिक भीड़ सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर देखने को मिली. स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह नौ बजे के बाद प्लेटफॉर्म पूरी तरह भर गया और स्टेशन परिसर तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आने लगीं.
कई वर्षों का रिकॉर्ड टूटा
दूसरी सोमवारी को लेकर इस बार डाकबमों की संख्या ने पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया. रेलवे स्टेशनों पर उमड़ी भीड़ ने प्रशासन और रेलवे दोनों की तैयारियों की परीक्षा ले ली.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रेनों में क्षमता से अधिक श्रद्धालु सवार दिखाई दिए. कई डाकबम ट्रेन के दरवाजों पर खड़े होकर यात्रा करते नजर आए. पूरे रेलखंड का माहौल गेरुआ रंग में रंगा दिखाई दिया और हर ओर बोलबम तथा हर-हर महादेव के जयघोष सुनाई देते रहे.
छर्रापट्टी घाट से पैदल बाबा मटेश्वरधाम तक
डाकबम पहले छर्रापट्टी घाट पहुंचकर गंगा स्नान और पूजा-अर्चना करेंगे. इसके बाद वे पैदल बाबा मटेश्वरधाम के लिए रवाना होंगे. श्रद्धालु देर रात तक मंदिर पहुंचकर अद्भुत शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करेंगे और जलाभिषेक कर बाबा का आशीर्वाद लेंगे.
पूरे कांवरिया मार्ग पर धार्मिक उत्साह चरम पर है. रास्ते भर बोलबम और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है.
स्टेशन से लेकर ट्रेन तक श्रद्धालुओं की भीड़
रविवार को सहरसा-मानसी रेलखंड पर चलने वाली ट्रेनों में डाकबमों की भारी भीड़ रही. प्लेटफॉर्म पर ट्रेन का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक थी कि यात्रियों की सामान्य आवाजाही भी प्रभावित होती दिखाई दी.
सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर स्थिति सबसे अधिक भीड़भाड़ वाली रही. प्लेटफॉर्म, फुटओवर ब्रिज और स्टेशन परिसर में गेरुआ वस्त्र पहने कांवरियों की लंबी कतारें नजर आती रहीं.
Sawan Somwari 2026 : प्रशासन और रेलवे के लिए चुनौती
दूसरी सोमवारी पर उमड़ी रिकॉर्ड भीड़ ने रेलवे और स्थानीय प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी. हजारों श्रद्धालुओं के एक साथ यात्रा करने से ट्रेनों और स्टेशनों पर अतिरिक्त दबाव देखा गया.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आने वाले वर्षों में भी ऐसी ही भीड़ रही, तो रेलखंड और कांवरिया मार्ग पर अतिरिक्त व्यवस्था की आवश्यकता होगी.
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