सहरसा : शिक्षक दिवस के अवसर पर सहरसा के मुरादपुर निवासी युवा वैज्ञानिक और विज्ञान लेखक डॉ. प्रसन्न कुमार ने शोध के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल कर जिले और बिहार का नाम रोशन किया है. उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की ओर से उन्हें रिसर्च अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया. इसके साथ ही उनकी टीम को सामूहिक रूप से 14 लाख 70 हजार रुपये का कैश प्राइज प्रदान किया गया.
डॉ. प्रसन्न कुमार, मुरादपुर निवासी बीरेन्द्र झा एवं रेखा झा के पुत्र हैं. उनकी इस उपलब्धि के बाद जिले में खुशी का माहौल है. लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है.
शोध और नवाचार के क्षेत्र में बनाई पहचान
डॉ. प्रसन्न कुमार ने शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है. विज्ञान लेखन के साथ कृषि और शोध के क्षेत्र में भी उनके कार्यों की चर्चा होती रही है. सीमित संसाधनों और विभिन्न चुनौतियों के बावजूद सहरसा जैसे जिले से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना क्षेत्र के लिए गौरव की बात बतायी जा रही है.
शिक्षक दिवस के अवसर पर मिली यह उपलब्धि बिहार के युवाओं की शोध और नवाचार क्षमता को भी रेखांकित करती है. जिले के लोगों का कहना है कि प्रतिभावान युवाओं को शोध के लिए बेहतर मंच, संसाधन और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाना जरूरी है.
युवा शोधार्थियों के लिए प्रेरणा
डॉ. प्रसन्न कुमार की सफलता को कोसी क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया जा रहा है. लोगों ने कहा कि बिहार के युवा विज्ञान, शोध, नवाचार और ज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की क्षमता रखते हैं. जरूरत सिर्फ उन्हें सही अवसर और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की है.
लोगों ने बिहार सरकार से भी युवा वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और नवाचार से जुड़े प्रतिभावान युवाओं को बेहतर अवसर और प्रोत्साहन देने की मांग की है.
उपलब्धि के मुख्य बिंदु
- सहरसा के मुरादपुर निवासी डॉ. प्रसन्न कुमार सम्मानित.
- लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की ओर से शोध कार्य के लिए अवार्ड.
- टीम को सामूहिक रूप से 14.70 लाख रुपये का कैश प्राइज.
- डॉ. प्रसन्न कुमार युवा वैज्ञानिक और विज्ञान लेखक हैं.
- शोध, नवाचार और कृषि के क्षेत्र में उनकी पहचान.
- उपलब्धि को कोसी क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया गया.
डॉ. प्रसन्न कुमार की उपलब्धि पर जिले के लोगों ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रतिभा को अवसर और प्रोत्साहन मिले तो वह नई ऊंचाइयां हासिल कर सकती है. लोगों ने उम्मीद जतायी कि उनकी शोध यात्रा आगे भी जारी रहेगी और उनकी सफलता बिहार के युवाओं को विज्ञान एवं शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी.
