सहरसा बस्ती में नशे के खिलाफ उठी आवाज, ‘नशा छोड़ो, परिवार जोड़ो’ के नारों से निकली जागरूकता रैली

सहरसा बस्ती को नशा मुक्त बनाने के लिए रविवार को विशाल जागरूकता रैली निकाली गई. 'नशा छोड़ो, परिवार जोड़ो' जैसे नारों के साथ नागरिकों ने नशे के खिलाफ एकजुटता दिखाई. अभियान का लक्ष्य हर घर तक जागरूकता पहुंचाना है.

सहरसा : सहरसा बस्ती को नशा मुक्त बनाने और युवाओं को नशे की लत से बचाने के उद्देश्य से रविवार को स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने जागरूकता रैली निकाली. ‘नशा मुक्त सहरसा बस्ती हमारी जिम्मेदारी’ अभियान के बैनर तले आयोजित रैली में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया और क्षेत्र को पूरी तरह नशा मुक्त बनाने का संकल्प लिया.

‘नशा छोड़ो, परिवार जोड़ो’ के नारों से गूंजा इलाका

रैली के दौरान युवा और बुजुर्ग एकजुट होकर ‘नशा छोड़ो, परिवार जोड़ो’, ‘हम सबको किसी से बैर नहीं, नशा कारोबारियों अब तेरी खैर नहीं’ जैसे नारे लगाते हुए आगे बढ़े. लोगों के हाथों में जागरूकता से जुड़े बैनर और पोस्टर थे.

इन पर ‘नशा तबाही है, जिंदगी नहीं’, ‘तालीम अपनाओ, मुस्तकबिल बनाओ’ और ‘सेहतमंद रहो, जिंदगी संवारो’ जैसे संदेश लिखे थे.

नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ एकजुटता का संदेश

रैली के माध्यम से नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में शामिल तत्वों के खिलाफ समाज की एकजुटता का संदेश दिया गया. आयोजकों और स्थानीय लोगों ने कहा कि नशे की वजह से युवाओं और परिवारों का भविष्य प्रभावित हो रहा है. ऐसे में समाज के हर वर्ग को मिलकर इसके खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है.

अभियान के मुख्य बिंदु

  • सहरसा बस्ती को नशा मुक्त बनाने का संकल्प.
  • युवाओं को नशे की लत से दूर रखने पर जोर.
  • हर घर तक जागरूकता पहुंचाने का लक्ष्य.
  • नशा पीड़ित परिवारों को सहयोग देने की अपील.
  • शिक्षा, बेहतर खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश.

शिक्षा और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने का संकल्प

अभियान में शामिल लोगों ने आने वाली पीढ़ी को शिक्षा और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने का संकल्प लिया. आयोजकों के अनुसार अभियान का उद्देश्य सिर्फ रैली तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे के खिलाफ लगातार सामाजिक जागरूकता पैदा करना और नशा पीड़ित परिवारों को संबल देना भी है.

मौके पर अध्यक्ष अंजुम हुसैन, समाजसेवी मो मंसूर आलम, मो कारी नुरूल्ला, मो अकबर हुसैन, डॉ खुर्शीद आलम, मो अली खान तारीक, मो कौसर, मो शमशेर खान, मो मेराज आलम, डॉ जफर इमाम, मो अहमद हुसैन, जियाउर रहमान, मो अमीर हसन, मो इलियास, मो नजीर, मो तोहिद, मौलाना कफिल, मो जुम्मन, मो सेफ, मो आसिफ, डॉ सज्जाद सरवर, मो आफताब, मो सकीम, महबूब आलम, फैजान आलम, मो हारुन, शेर अफगान मिर्जा सहित बड़ी संख्या में समाज के सदस्य, युवा और बच्चे मौजूद थे.

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By Vinay Kumar Mishra

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