सहरसा में 12 साल पुरानी तैनाती पर गिरी गाज, अब सुपौल-मधेपुरा में भी खंगाली जाएगी पुलिसकर्मियों की कुंडली

पुलिस महकमे में लंबे समय से एक ही पद पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों की अब खैर नहीं. दो साल से अधिक समय से एक ही स्थान पर तैनात पुलिसकर्मियों की व्यापक समीक्षा शुरू हो गई है. कोसी प्रक्षेत्र में शुरू हुई इस पड़ताल में नियमों की अनदेखी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

Saharsa Police Transfer: सहरसा में कोसी प्रक्षेत्र में वर्षों से एक ही कार्यालय या पद पर जमे पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं. पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद अब ऐसे पुलिसकर्मियों की पदस्थापना अवधि की समीक्षा शुरू कर दी गई है, जो निर्धारित समय से अधिक एक ही जगह पर काम कर रहे हैं.

इस कार्रवाई की शुरुआत सहरसा में एक ऐसे पुलिसकर्मी के मामले से हुई, जो करीब 12 वर्षों से एक ही कार्यालय में तैनात था. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि उसका तबादला पहले ही रोहतास जिला बल के लिए किया जा चुका था. इसके बावजूद वह लंबे समय तक उसी कार्यालय में कार्यरत रहा. मामले में अन्य अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आने के बाद उसे तत्काल विरमित कर मूल पदस्थापना स्थल भेजने का आदेश दिया गया.

अब इसी कार्रवाई के बाद सहरसा के साथ-साथ सुपौल और मधेपुरा में भी लंबे समय से एक ही जगह तैनात पुलिसकर्मियों की पड़ताल तेज कर दी गई है.

2 साल से ज्यादा एक जगह तैनाती पर होगी समीक्षा

पुलिस मुख्यालय के निर्देश के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में किसी भी पुलिस पदाधिकारी या कर्मी को दो वर्ष से अधिक समय तक एक ही स्थान या कार्यालय में पदस्थापित नहीं रखा जाना चाहिए.

इसके बावजूद अगर कोई पुलिसकर्मी वर्षों से एक ही कार्यालय में तैनात है तो अब उसकी पदस्थापना की अवधि और वहां बने रहने की वजह की समीक्षा की जाएगी.

विभागीय स्तर पर यह भी देखा जाएगा कि संबंधित कर्मी का तबादला हुआ था या नहीं. अगर तबादले के बावजूद वह पुराने कार्यालय में बना रहा तो इसकी वजह भी जांच के दायरे में होगी.

12 साल तक एक ही कार्यालय में कैसे रहा कर्मी?

सहरसा में सामने आए मामले ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया है कि निर्धारित अवधि से कई गुना अधिक समय तक कोई पुलिसकर्मी एक ही कार्यालय में कैसे तैनात रहा.

जानकारी के अनुसार संबंधित पुलिसकर्मी पुलिस अधीक्षक कार्यालय की गोपनीय शाखा में कार्यरत था. जांच में पता चला कि वह करीब 12 वर्षों से वहीं काम कर रहा था.

उसका तबादला पहले ही रोहतास जिला बल के लिए किया जा चुका था, लेकिन वह मूल पदस्थापना स्थल पर नहीं गया था. जांच के दौरान उसके संबंध में अन्य अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आईं.

इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल विरमित कर रोहतास जिला बल भेजने का आदेश दिया.

डीआइजी डॉ कुमार आशीष ने कार्रवाई की पुष्टि की

कोसी प्रक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक डीआइजी डॉ कुमार आशीष ने संबंधित मामले में कार्रवाई की पुष्टि की है.

उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई. जांच में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित पुलिसकर्मी करीब 12 वर्षों से एक ही कार्यालय में कार्यरत था.

डीआइजी के अनुसार उसका तबादला पहले ही रोहतास जिला बल के लिए हो चुका था. जांच के दौरान अन्य अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आईं. इसके आधार पर उसे तत्काल विरमित कर मूल पदस्थापना स्थल भेजने का आदेश दिया गया.

उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य परिस्थितियों में किसी भी पुलिस पदाधिकारी या कर्मी को दो वर्ष से अधिक समय तक एक ही स्थान पर नहीं रहना चाहिए. ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए समीक्षा की जा रही है.

अब सुपौल और मधेपुरा की भी बारी

समीक्षा सिर्फ सहरसा तक सीमित नहीं रहेगी. जानकारी के अनुसार कोसी प्रक्षेत्र के डीआइजी कार्यालय ने सुपौल और मधेपुरा में भी लंबे समय से एक ही कार्यालय में तैनात पुलिसकर्मियों और पदाधिकारियों की पहचान शुरू कर दी है.

इसके लिए उनकी पदस्थापना अवधि की जानकारी जुटाई जा रही है. संबंधित कर्मी कितने समय से एक ही जगह पर हैं और किन परिस्थितियों में इतने लंबे समय तक वहीं बने रहे, इसकी भी पड़ताल की जाएगी.

यदि जांच में नियमों की अनदेखी या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.

लंबे समय तक एक जगह तैनाती पर क्यों उठते हैं सवाल?

पुलिस विभाग में लंबे समय तक एक ही कार्यालय या पद पर तैनाती को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं.

विभागीय स्तर पर माना जाता है कि लंबे समय तक एक ही जगह तैनाती से पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका रहती है. कार्य संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं.

इसी वजह से पुलिस मुख्यालय की ओर से स्थानांतरण और पदस्थापन को लेकर समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं.

अब कोसी प्रक्षेत्र में शुरू हुई समीक्षा का उद्देश्य इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना भी माना जा रहा है.

सिर्फ तबादला नहीं, वजह भी खंगाली जाएगी

इस समीक्षा में केवल यह देखना ही महत्वपूर्ण नहीं होगा कि कौन कितने वर्षों से एक ही जगह पर तैनात है. यह भी देखा जाएगा कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी संबंधित कर्मी को उसी कार्यालय में रखने की परिस्थितियां क्या थीं.

किसी कर्मचारी का तबादला होने के बावजूद अगर उसने नई जगह योगदान नहीं दिया या लंबे समय तक पुराने कार्यालय में बना रहा, तो ऐसे मामलों को भी गंभीरता से लिया जा सकता है.

यही वजह है कि आने वाले दिनों में तैयार होने वाली सूची कई पुलिसकर्मियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

बड़े पैमाने पर तबादले की भी बन सकती है स्थिति

कोसी प्रक्षेत्र के जिलों में पदस्थापना अवधि की समीक्षा के बाद रिपोर्ट तैयार की जा रही है. रिपोर्ट के आधार पर जरूरत पड़ने पर बड़े पैमाने पर स्थानांतरण और प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है.

फिलहाल विभाग का फोकस उन पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों की पहचान पर है, जो सामान्य अवधि से अधिक समय से एक ही कार्यालय या स्थान पर तैनात हैं.

सहरसा में 12 साल से एक ही कार्यालय में तैनात कर्मी पर हुई कार्रवाई ने इस पूरी कवायद को गति दे दी है. अब सुपौल और मधेपुरा में होने वाली जांच से यह स्पष्ट होगा कि ऐसे कितने मामले सामने आते हैं और विभाग उनके खिलाफ क्या कदम उठाता है.

Saharsa Police Transfer: पारदर्शिता और जवाबदेही पर रहेगा जोर

पदस्थापन की अवधि की समीक्षा का असर केवल स्थानांतरण तक सीमित नहीं माना जा रहा है. विभाग का उद्देश्य पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही को मजबूत करना भी है.

अब लंबे समय से एक ही कार्यालय में जमे पुलिसकर्मियों की नजर इस समीक्षा पर रहेगी. वहीं आम लोगों की निगाह इस बात पर होगी कि जांच के बाद वास्तव में कितने मामलों में कार्रवाई होती है और वर्षों से चली आ रही ऐसी व्यवस्था पर कितना प्रभावी अंकुश लगता है.

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लेखक के बारे में

By अंजन आर्यन सिंह

पत्रकारिता में 14 वर्षों का अनुभव. अब तक लगातार सहरसा से क्राइम और स्वास्थ्य की खबरें संकलित करता हूं.

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