सहरसा में मखाना रिसर्च सेंटर बनाने का रास्ता साफ, रोजगार के बढ़ेंगे अवसर

सहरसा में मखाना रिसर्च सेंटर बनाने का रास्ता साफ, रोजगार के बढ़ेंगे अवसर

जिले के मखाना किसानों को आखिकार मिला वाजिब हक सहरसा . आखिरकार मखाना रिसर्च सेंटर को जिले में स्वीकृति मिल जाने से सहरसा जिला हकमारी से बच गया. इससे पहले इस सेंटर को पूर्णिया ले जाने की तैयारी चल रही थी, जिससे यहां के किसानों के हित प्रभावित होने की आशंका थी. दरअसल, सहरसा में मखाना का उत्पादन उस समय से होता आ रहा है, जब यह फसल व्यापक रूप से जानी भी नहीं जाती थी. यहां के किसान लगातार घाटा सहने के बावजूद इस खेती से जुड़े रहे. बाद में जब केंद्र और राज्य सरकार ने मखाना खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं शुरू कीं, तो किसानों की रुचि बढ़ी और इसका दायरा भी विस्तारित हुआ. मखाना को जीआई टैग मिलने के बाद आसपास के कई जिलों में भी इसकी खेती का विस्तार हुआ और प्रोसेसिंग मशीनों की मांग बढ़ी. इसी बीच मखाना रिसर्च सेंटर खोलने की घोषणा हुई, तो कई जिले इसे अपने यहां स्थापित कराने की होड़ में शामिल हो गए. खासकर पूर्णिया जिला इसे अपने यहां ले जाने की दिशा में सक्रिय हो गया, जिससे सहरसा के किसान हतोत्साहित हो गए थे. हालांकि, अंततः केंद्र और राज्य सरकार ने सहरसा के किसानों के अधिकार को मान्यता देते हुए मखाना रिसर्च सेंटर को सहरसा में ही स्थापित करने की स्वीकृति दे दी. इससे मखाना किसानों और इससे जुड़े कारोबारियों में खुशी की लहर है. प्रस्तावित योजना के अनुसार, मखाना रिसर्च सेंटर अगवानपुर कृषि महाविद्यालय में स्थापित किया जाएगा. इसके लिए अलग भवन बनाया जाएगा और 30 से 40 कृषि वैज्ञानिक मिलकर इसका रोडमैप तैयार करेंगे. इससे क्षेत्र को मखाना उत्पादन का बड़ा हब बनाने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. अगवानपुर कृषि महाविद्यालय की प्राचार्य अरुणिमा कुमारी ने बताया कि अभी तक इस संबंध में आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन यह तय हो चुका है कि रिसर्च सेंटर सहरसा में ही खुलेगा. पत्र मिलते ही तैयारी शुरू कर दी जाएगी और जल्द ही स्थापना का कार्य पूरा किया जाएगा.जिले के कृषि विशेषज्ञों, मखाना किसानों और कारोबारियों ने इसे जिले का वाजिब हक बताया है. उनका कहना है कि इसे पूर्णिया में खोलने की चर्चा से किसान निराश थे और इसे सहरसा के साथ सौतेला व्यवहार मान रहे थे. अब सही निर्णय से किसानों को उनका अधिकार मिल गया है. कोसी क्षेत्र के सहरसा, सुपौल और मधेपुरा सहित सीमांचल के पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज और खगड़िया जिलों में कुल 31,497 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना की खेती होती है. यहां से लगभग 74,901 टन बीज और 37,450 टन प्रोसेस्ड मखाना का उत्पादन होता है, जिसमें सबसे अधिक हिस्सेदारी सहरसा जिले की है. पहले जहां 4 से 5 हजार हेक्टेयर में इसकी खेती होती थी, वहीं अब इसका दायरा काफी बढ़ चुका है. देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 85 से 90 प्रतिशत है, जिसमें सहरसा प्रमुख भूमिका निभाता है. अगवानपुर कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. सुनीता पासवान ने इसे जिले के लिए बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि इस रिसर्च सेंटर के शुरू होने से न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि इससे जुड़े हजारों परिवारों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे. साथ ही युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे और क्षेत्र का समग्र विकास होगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे सहरसा का मखाना सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेगा और “उजला सोना” साबित होगा. फोटो – सहरसा 16 – मखाना तैयार करते किसान परिवार

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By Dipankar Shriwastaw

Dipankar Shriwastaw is a contributor at Prabhat Khabar.

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