कोसी में ‘ऑपरेशन तलाश’ शुरू, 21 दिनों तक गुमशुदा बच्चों को खोजेगी पुलिस, तस्करी नेटवर्क पर भी नजर

लापता और अपहृत बच्चों की तलाश के लिए कोसी क्षेत्र में 'ऑपरेशन तलाश' अभियान शुरू हो गया है. यह अभियान 20 अगस्त से 10 सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसका उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाना है.

Operation Talaash: कोसी क्षेत्र में गुमशुदा, लापता और अपहृत बच्चों की तलाश अब तेज होगी. पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिले में 20 अगस्त से 10 सितंबर 2026 तक ‘ऑपरेशन तलाश’ चलाया जा रहा है. अभियान का उद्देश्य सिर्फ लापता बच्चों को खोजकर उनके परिवार तक पहुंचाना नहीं, बल्कि उन नेटवर्क पर भी कार्रवाई करना है, जो बच्चों और युवाओं को बहला-फुसलाकर मानव तस्करी, बाल श्रम और अन्य अपराधों की ओर धकेलते हैं.

इसी को लेकर गुरुवार को कोसी क्षेत्र के डीआईजी कार्यालय, सहरसा में समीक्षा बैठक हुई. इसमें तीनों जिलों की मानव व्यापार निरोध इकाई (एएचटीयू) के प्रभारी पदाधिकारी शामिल हुए. डीआईजी ने अभियान की समीक्षा करते हुए सभी जिलों को सघन अभियान चलाने और गुमशुदा, लापता एवं अपहृत बच्चों की सुरक्षित बरामदगी को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया.

महिला हेल्प डेस्क से एएचटीयू तक, कई टीमें मिलकर करेंगी तलाश

‘ऑपरेशन तलाश’ को प्रभावी बनाने के लिए अलग-अलग पुलिस इकाइयों को एक साथ काम करने की जिम्मेदारी दी गयी है. थानों की महिला हेल्प डेस्क, बाल कल्याण हेल्प डेस्क, बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी, मानव व्यापार निरोध इकाई, महिला थानाध्यक्ष और पुलिस दीदी यानी अभया ब्रिगेड अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे.

पुलिस को निर्देश दिया गया है कि पुराने गुमशुदगी और अपहरण के मामलों की भी गंभीरता से समीक्षा की जाए. संदिग्ध गतिविधियों वाले स्थानों पर नजर रखी जाए और बच्चों की तलाश में उपलब्ध सूचनाओं का इस्तेमाल करते हुए कार्रवाई को तेज किया जाए.

प्रेमजाल और नौकरी का झांसा, बच्चों को फंसाने का बन रहा जरिया

पुलिस के अनुसार, बच्चों और युवाओं को फंसाने के लिए अपराधी कई तरह के तरीके अपना रहे हैं. सोशल मीडिया, फर्जी फोन कॉल, नौकरी का झांसा और प्रेमजाल के माध्यम से उन्हें अपने संपर्क में लाया जाता है. इसके बाद कई मामलों में उन्हें दूसरे राज्यों में ले जाने की आशंका रहती है.

ऐसे मामलों में मानव तस्करी, जबरन विवाह, बाल श्रम और अन्य अवैध गतिविधियों का खतरा बढ़ जाता है. यही वजह है कि अभियान में केवल गुमशुदा बच्चों की तलाश ही नहीं, बल्कि उन्हें गायब करने वाले संभावित नेटवर्क की पहचान पर भी जोर दिया जा रहा है.

साइबर अपराध पर भी पुलिस की विशेष नजर

अभियान के दौरान साइबर माध्यम से होने वाले अपराधों पर भी विशेष निगरानी रखी जायेगी. पुलिस ने लोगों को अनजान नंबरों से आने वाले कॉल और सोशल मीडिया पर मिलने वाले संदिग्ध संपर्कों से सावधान रहने की सलाह दी है.

विशेषकर बच्चों और युवाओं को नौकरी, पढ़ाई, मदद या दोस्ती के नाम पर भेजे जाने वाले संदिग्ध संदेशों और प्रस्तावों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. अभिभावकों से भी बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने और किसी संदिग्ध संपर्क की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की अपील की गयी है.

10 सितंबर तक चलेगा अभियान, बरामदगी पर रहेगा जोर

डीआईजी ने तीनों जिलों की पुलिस को 20 अगस्त से 10 सितंबर तक अभियान को प्रभावी तरीके से संचालित करने का निर्देश दिया है. इस दौरान गुमशुदा और अपहृत बच्चों से जुड़े मामलों की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा की जायेगी.

अभियान की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि पुलिस को पुराने मामलों में कितनी नई जानकारी मिलती है और उसका इस्तेमाल कितनी तेजी से किया जाता है. बच्चों की सुरक्षित बरामदगी के साथ-साथ उन्हें दोबारा अपराधियों के चंगुल में जाने से रोकना भी पुलिस के सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी.

Operation Talaash: पुलिस के साथ आम लोगों की भूमिका भी अहम

मानव तस्करी और बाल अपराध जैसे मामलों में समय पर सूचना मिलना बेहद महत्वपूर्ण है. किसी बच्चे के अचानक गायब होने, संदिग्ध व्यक्ति द्वारा बच्चों को बाहर ले जाने, नौकरी के नाम पर युवाओं को दूसरे राज्यों में भेजने या किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर पुलिस को तत्काल सूचना देने की अपील की गयी है.

पुलिस का मानना है कि केवल अभियान चलाने से इन अपराधों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगाया जा सकता. इसके लिए परिवार, समाज और पुलिस के बीच लगातार सहयोग जरूरी है. ‘ऑपरेशन तलाश’ इसी सामूहिक प्रयास के जरिए गुमशुदा बच्चों को सुरक्षित वापस लाने और मानव तस्करी के नेटवर्क पर शिकंजा कसने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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By अंजन आर्यन सिंह

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