Saharsa News: सहरसा में सरकारी नौकरी के बाद बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा को लेकर कर्मचारियों का गुस्सा एक बार फिर सामने आया. पुरानी पेंशन व्यवस्था की पुनर्बहाली की मांग को लेकर मंगलवार को सहरसा समाहरणालय के गेट पर बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ से जुड़े कर्मचारियों ने आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया. भोजनावकाश के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी जुटे और पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की.
प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम मांग-पत्र सौंपा. कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने के साथ पीएफआरडीए कानून वापस लेने और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देने की मांग भी उठायी.
एक सितंबर को कर्मचारी क्यों मानते हैं काला दिन
महासंघ के जिलाध्यक्ष प्रभात कुमार सिंह ने कहा कि बिहार के कर्मचारियों के लिए एक सितंबर महज कैलेंडर की तारीख नहीं है, बल्कि काला दिन है. उनके मुताबिक इसी दिन कर्मचारियों से बुढ़ापे की सामाजिक सुरक्षा का बड़ा सहारा छीन लिया गया.
उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन केवल विरोध दर्ज कराने के लिए नहीं है. इसका उद्देश्य सरकार को यह संदेश देना है कि कर्मचारी पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली के लिए एकजुट हैं और अपनी मांग को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे.
कर्मचारियों ने सरकार से पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने, पीएफआरडीए कानून वापस लेने और कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देने की मांग की.
2004 में केंद्र और 2005 में बिहार में बदली व्यवस्था
प्रदर्शन का नेतृत्व महासंघ के जिला मंत्री शरद कुमार ने किया. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जनवरी 2004 से कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त कर नई पेंशन व्यवस्था लागू की. इसके बाद बिहार में भी एक सितंबर 2005 से पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त कर दी गयी.
महासंघ के नेताओं के अनुसार, पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त होने के बाद से ही कर्मचारी इसकी पुनर्बहाली की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं. उनका कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है.
पीएफआरडीए कानून को भी बताया बड़ी बाधा
कर्मचारी नेताओं ने दिसंबर 2013 से प्रभावी पीएफआरडीए कानून को भी पुरानी पेंशन की बहाली की राह में बड़ी बाधा बताया. उनका कहना है कि इस कानून के खिलाफ और पुरानी पेंशन की पुनर्बहाली के लिए अखिल भारतीय फेडरेशन के नेतृत्व में देशभर के कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं.
सहरसा में हुआ प्रदर्शन इसी व्यापक आंदोलन का हिस्सा था. कर्मचारियों ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की.
समाहरणालय गेट पर जुटे सैकड़ों कर्मचारी
भोजनावकाश के दौरान कर्मचारी समाहरणालय गेट पर जुटे. विभिन्न संवर्गों और विभागों से जुड़े कर्मचारियों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया. इस दौरान पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने के समर्थन में नारे लगाये गये.
प्रदर्शन में महासंघ अध्यक्ष ललित नारायण मिश्र, रमण कुमार, सहायक जिला मंत्री सूरज कुमार, यिशु सिंह, अभिषेक कुमार, बिहार अनुसचिवीय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष समरेंद्र सिंह, जिला मंत्री अनिष कुमार, अनुज, मनीष कुमार सिंह और हेमचंद्र सहित कई कर्मचारी शामिल हुए.
राजस्व कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संतोष कुमार झा, स्वास्थ्य संघ के जिला संयोजक कुमार प्रियांशु सिंह, नंदकुमार खां, सुरेश यादव और अभिषेक कुमार मिश्रा भी प्रदर्शन में मौजूद रहे.
इसके अलावा शिक्षा अनुसचिवीय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश नंदन झा, जिला मंत्री शशि शेखर सिंह, ओमशंकर, कृषि कर्मचारी संघ के प्रीतम, दुर्गेश, हर्षवर्धन, सिंचाई संघ के जिला मंत्री खगेस सिंह, अध्यक्ष उमेश कुमार यादव, अमित भारद्वाज, रामचंद्र प्रसाद मंडल, जयकिशन पासवान, आलोक चंद्र, संतोष यादव, रुपेश यादव, गोपाल सिंह और चालक संघ अध्यक्ष श्याम सुंदर यादव समेत विभिन्न विभागों और संवर्गों के सैकड़ों कर्मचारी शामिल हुए.
Saharsa News: अब सरकार के रुख पर टिकी कर्मचारियों की नजर
कर्मचारियों ने प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम मांग-पत्र सौंपकर अपनी मांगें सरकार तक पहुंचायी हैं. अब कर्मचारियों की नजर सरकार के रुख पर है.
महासंघ नेताओं ने साफ किया कि पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा. ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कर्मचारी संगठनों की ओर से आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी नजर रहेगी.
कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन केवल आर्थिक लाभ का विषय नहीं, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा सवाल है. इसी वजह से वे इसे अपनी प्रमुख मांगों में शामिल करते हुए लगातार आंदोलन कर रहे हैं.
