Premchand Jayanti : राजकीय डिग्री महाविद्यालय सत्तरकटैया में आयोजित प्रेमचंद जयंती समारोह की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. इंदु कुमारी ने की. उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद केवल महान साहित्यकार ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक भी थे. उनकी रचनाएं सामाजिक कुरीतियों, असमानता और शोषण के खिलाफ जनजागरण का माध्यम बनीं. उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे प्रेमचंद के साहित्य को केवल परीक्षा तक सीमित न रखें, बल्कि उनकी रचनाओं को पढ़कर उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें.
प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज का आईना
कार्यक्रम में अर्थपाल डॉ. विवेक प्रकाश सिंह ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य ग्रामीण भारत, किसानों की समस्याओं, शोषित वर्ग और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज है. उनके उपन्यास और कहानियां आज भी सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय मूल्यों का संदेश देती हैं. उन्होंने कहा कि बदलते समय में भी प्रेमचंद की रचनाएं अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए हैं.
गोदान और पूस की रात पर हुई विशेष चर्चा
गोष्ठी को संबोधित करते हुए डॉ. अमीश कुमार ने प्रेमचंद के कालखंड और औपनिवेशिक भारत की सामाजिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों पर प्रकाश डाला. वहीं डॉ. कौशल किशोर झा ने 'गोदान' और 'पूस की रात' जैसी कालजयी रचनाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों की समस्याओं और सामाजिक विषमताओं को विस्तार से समझाया. डॉ. चंदनकिशोर ने प्रेमचंद के साहित्य में निहित सामाजिक और राजनीतिक चेतना पर अपने विचार रखे.
विद्यार्थियों ने भी साझा किए अपने विचार
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने भी मुंशी प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए. डॉ. गोपाल साह ने प्रेमचंद के साहित्य के वैश्विक प्रभाव और उनकी रचनाओं के विभिन्न भाषाओं में हुए अनुवाद की महत्ता बताई. वहीं शैलेन्द्र कुमार ने प्रेमचंद की सरल, सहज और आमजन से जुड़ी भाषा की सराहना करते हुए कहा कि यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी, जिसने उन्हें जन-जन का साहित्यकार बनाया.
धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मयंक भार्गव ने किया. उन्होंने सभी वक्ताओं, शिक्षकगण, विद्यार्थियों और महाविद्यालय कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया. समारोह में महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे. पूरे आयोजन में साहित्य, समाज और शिक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश देने पर विशेष जोर दिया गया.
