मन ही सुख, दुख का है कारण व मन ही है मित्र व शत्रुः डॉ अरूण

मन ही सुख, दुख का है कारण व मन ही है मित्र व शत्रुः डॉ अरूण

गायत्री शक्तिपीठ में व्यक्तित्व परिष्कार सत्र का आयोजन सहरसा . गायत्री शक्तिपीठ में रविवार को व्यक्तित्व परिष्कार सत्र का आयोजन किया गया. सत्र को संबोधित करते डॉ अरुण कुमार जायसवाल ने ध्यान के महत्व को बताते कहा कि सहज भाव से अंतर्मुखी होने पर अंतःकरण शक्ति जागृत हो जाती है. ध्यान के बाद ओजस्वी, तेजस्वी होंगे. ध्यान प्रतिदिन करें तो स्वस्थ, प्रसन्न हो जायेंगे. जन्म-जन्मांतर के कुसंस्कार जो चित्त में है परत दर परत हट जायेंगे. सहज सरल निश्छल जीवन जीयेंगे. ध्यान से व्यक्तित्व में बदलाव आता है. गुरु के महत्व को बताते कहा कि गुरु जो देता है, वह अमूल्य होता है. गुरु नानक देव कहते हैं कि जो आपको तार दे वह होता है मंत्र. जो मन के पार उतार दे वह है मंत्र. मन ही सुख, दुख का कारण है. मन ही मित्र है, मन ही शत्रु है. मन के पार चले जायें. इच्छाएं, वासनाएं, कामनाएं इसको तिरोहित करें तो आप स्वस्थ होते जायेंगे. उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र सद्बुद्धि, सद्ज्ञान का मंत्र है. गायत्री को महामंत्र कहते हैं. इस मंत्र के जप से एक लाख चार हजार ध्वनि तरंग उत्पन्न होता है. इतना और किसी मंत्र से उत्पन्न नहीं होता है.

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