इग्नू का 38वां दीक्षांत समारोह आयोजित विभिन्न पाठ्यक्रम के लगभग छह हजार सफल शिक्षार्थियों को दिया गया प्रमाणपत्र प्रतिनिधि, सहरसा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के 38वें दीक्षांत समारोह को लेकर इग्नू क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा बुधवार को प्रेक्षागृह में कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो डॉ बिमलेंदू शेखर झा, क्षेत्रीय निदेशक डॉ मिर्जा नेहाल अहमद बेग सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया. स्वागत संबोधन करते क्षेत्रीय निदेशक डॉ बेग ने कहा कि आज इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय का 38वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया जा रहा है. विश्वविद्यालय का मुख्य समारोह नयी दिल्ली स्थित मुख्यालय से किया गया. उन्होंने कहा कि क्षेत्रिय केंद्र में पांच हजार सात सौ शिक्षार्थी उतीर्ण हुए हैं. क्षेत्रीय केंद्र सहरसा के दीक्षांत समारोह में लगभग तीन सौ शिक्षार्थी को प्रमाणपत्र दिया गया. उन्होंने कहा कि इग्नू ने उल्लेखनीय प्रगति की है जो हम सबों के लिए गर्व की बात है. राज्य में चार क्षेत्रीय केंद्र हैं. जिनमें सहरसा का क्षेत्रीय केंद्र कोसी व सीमांचल क्षेत्र के आठ जिलों को कवर करता है. सहरसा पिछले छह वर्षों से लगातार 25 हजार से अधिक शिक्षार्थियों का पंजीयन कर रहा है. मुख्य अतिथि डॉ बीएस झा ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षार्थियों के जीवन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है. यह अवसर इंगित करता है कि शिक्षा में अपनी योग्यता शिक्षार्थियों ने साबित कर दी है. इग्नू विश्वविद्यालय ने अपनी विशिष्ट स्थिति बरकरार रखी है व निरंतर वृद्धि व विस्तार की ओर बढ़ रही है. इसका कार्य एक समग्र शिक्षार्थी का विकास करना है. यह केवल कक्षा, कक्षा में सीखने या केवल केस पद्धति के माध्यम से नहीं हो सकता है. बड़ी आबादी वाले विकासशील देशों के लिए दूरस्थ शिक्षा प्रणाली सबसे अच्छा तरीका है. इग्नू ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्र, विकलांग समूह, जेलों व पुनर्वास केंद्रों, सरकारी व गैर सरकारी संगठन, माता-पिता व गृहणियों, नियोक्ताओं व नियोजित लोगों की शैक्षिक आकांक्षाओं को पूरा करता है. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में कई ऐसे परिवर्तन हुए जिससे हम 2047 तक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में पहुंच सकते हैं. इसे लचीला बनाया गया है. नई शिक्षा नीति में सार्थक व सकारात्मक ज्ञान के द्वार खोल दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य शोषण की प्रवृत्ति को समाप्त करना हैं. इससे ज्ञानियों का सम्मान बढ़ेगा, रोजगार के संसाधन बढ़ेंगे व नई पीढ़ी में ज्ञान व मानवता का विकास होगा. जिससे भारत विश्व गुरु बनेगा. कार्यक्रम में मौजूद लगभग तीन सौ सफल शिक्षार्थियों के बीच सर्टिफिकेट वितरण किया गया. फोटो – सहरसा 06 – कार्यक्रम का शुभारंभ करते अतिथि.
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