Matsyagandha Lake Saharsa: सहरसा. वर्षों तक उपेक्षा और इंतजार झेलने वाली सहरसा की मत्स्यगंधा झील अब नए रूप में नजर आने लगी है. कभी बदहाल व्यवस्था के कारण चर्चा में रहने वाला यह पर्यटन स्थल अब निर्माण कार्यों के चलते तेजी से बदल रहा है. करीब 98 करोड़ रुपये की पर्यटन परियोजना के तहत झील परिसर में कई संरचनाएं आकार ले चुकी हैं और कई जगह फिनिशिंग का काम चल रहा है.
इस परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण प्रस्तावित ग्लास ब्रिज है. तकनीकी अड़चनों और स्वीकृति में हुई देरी के बाद अब इसके निर्माण का काम शुरू हो गया है. झील में पानी के ऊपर बनने वाला यह ग्लास ब्रिज पर्यटकों को अलग तरह का अनुभव देने के लिए तैयार किया जा रहा है. इसके अलावा 400 मीटर घाट का कायाकल्प अंतिम चरण में है, जबकि होटल कोसी बिहार के पास बन रहा फूड कोर्ट भी अंतिम दौर में पहुंच गया है.
पानी के ऊपर दिखेगा झील का नया नजारा
मत्स्यगंधा परियोजना में ग्लास ब्रिज को प्रमुख आकर्षण के तौर पर शामिल किया गया है. प्रोजेक्ट इंजीनियर गौतम कुमार के अनुसार, ग्लास ब्रिज के फाउंडेशन का करीब आधा काम पूरा हो चुका है. झील में पानी भरे रहने के कारण निर्माण के दौरान कुछ कठिनाइयां आ रही हैं, लेकिन काम जारी है.
ग्लास ब्रिज का निर्माण अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके तैयार होने के बाद पर्यटक झील के ऊपर से पानी और आसपास के प्राकृतिक नजारे को करीब से देख सकेंगे. परियोजना में मल्टीकलर फाउंटेन का काम भी अंतिम चरण में है. फाउंटेन और प्रकाश व्यवस्था के जरिये शाम के समय झील परिसर को आकर्षक बनाने की योजना है.
400 मीटर घाट को मिलेगा नया रूप
झील के करीब 400 मीटर लंबे घाट का भी कायाकल्प किया जा रहा है. यहां बैठने की व्यवस्था, आधुनिक प्रकाश, साज-सज्जा, सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में बताया जा रहा है.
योजना के तहत घाट को केवल धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों और पर्यटकों के लिए बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी है. झील के किनारे बैठने और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने के लिए भी सुविधाएं तैयार की जा रही हैं.
झील किनारे दिखेगी मत्स्यगंधा की कहानी
परियोजना में मत्स्यगंधा आधारित म्यूजियम भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसका उद्देश्य स्थानीय इतिहास, संस्कृति और मत्स्यगंधा से जुड़ी पौराणिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करना है.
प्रस्तावित म्यूजियम में डिजिटल डिस्प्ले, आर्ट गैलरी और प्राचीन दस्तावेजों के संग्रह जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. इससे पर्यटन स्थल को केवल मनोरंजन केंद्र के रूप में विकसित करने के बजाय स्थानीय इतिहास और संस्कृति से जोड़ने की कोशिश की जा रही है.
होटल कोसी बिहार के समीप बन रहे फूड कोर्ट का स्ट्रक्चर लगभग तैयार हो चुका है. निर्माण एजेंसी के अनुसार, फूड कोर्ट का काम अक्टूबर तक पूरा होने की संभावना है. इसके अलावा एक्सपीरियंस सेंटर, अर्बन हाट सहित कई संरचनाओं का स्ट्रक्चर वर्क लगभग पूरा हो चुका है और कई स्थानों पर फिनिशिंग का काम चल रहा है.
होटल कोसी बिहार के रिनोवेशन की भी योजना
मत्स्यगंधा के विकास को सिर्फ झील परिसर तक सीमित नहीं रखा गया है. होटल कोसी बिहार के रिनोवेशन की भी योजना है. इसका उद्देश्य पर्यटकों के लिए ठहरने की सुविधा को बेहतर करना है.
करीब 98 करोड़ रुपये की परियोजना में सेंट्रल एंट्रेंस प्लाजा, एक्सपीरियंस सेंटर, शोरवेनियर शॉप, टॉयलेट ब्लॉक, दुकानें, फूड कोर्ट सह एडमिन ब्लॉक, हाट और पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं.
इसके साथ तीन प्रवेश द्वार, प्रॉमिनेंट एलिवेटेड वॉक-वे, सेंट्रल स्टैचू, ट्री ऑफ लाइट, सुपर ट्रीज, सेंट्रल पाउंड, परफॉर्मेंस स्टेज, सेल्फी प्वाइंट, मेला ग्राउंड, पाथवे और लैंडस्केपिंग भी परियोजना का हिस्सा हैं.
इन सभी संरचनाओं के पूरा होने के बाद झील परिसर का स्वरूप मौजूदा स्थिति से काफी अलग होने की योजना है.
पर्यटन के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद
परियोजना में झील के प्राकृतिक स्वरूप को बेहतर करने के साथ पर्यटन गतिविधियों के लिए जरूरी आधारभूत सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर है. परियोजना पूरी होने के बाद गाइड, सफाईकर्मी, सुरक्षाकर्मी, म्यूजियम स्टाफ, दुकानदार, फूड कोर्ट और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
प्रोजेक्ट इंजीनियर गौतम कुमार के अनुसार, प्रस्तावित अधिकांश कार्यों का स्ट्रक्चर वर्क लगभग पूरा हो चुका है. अब कई हिस्सों में फिनिशिंग का काम चल रहा है. ग्लास ब्रिज का फाउंडेशन वर्क भी आगे बढ़ चुका है.
Matsyagandha Lake Saharsa: अब तय समय पर काम पूरा होने की चुनौती
मत्स्यगंधा में चल रहा निर्माण अब सिर्फ कागज पर दर्ज परियोजना नहीं रह गया है. फूड कोर्ट का स्ट्रक्चर तैयार है, 400 मीटर घाट का कायाकल्प अंतिम चरण में है और ग्लास ब्रिज के फाउंडेशन का काम शुरू हो चुका है.
करीब 98 करोड़ रुपये की इस परियोजना से मत्स्यगंधा को नया पर्यटन स्वरूप देने की तैयारी है. अब परियोजना की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण कार्य तय समयसीमा में कितनी तेजी से और प्रस्तावित गुणवत्ता के साथ पूरा होता है. यदि परियोजना का खाका उसी रूप में जमीन पर उतरता है, जैसा प्रस्तावित किया गया है, तो मत्स्यगंधा सहरसा के पर्यटन परिदृश्य में महत्वपूर्ण आकर्षण के रूप में विकसित हो सकता है.
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